सीमावर्ती जिले में पहली बार डिजिटल मॉडल पर आगे बढ़ रही स्व-गणना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। शुक्रवार इस प्रक्रिया का अंतिम दिन है और इसके साथ ही जिले में जनभागीदारी का नया प्रशासनिक मॉडल भी उभरकर सामने आया है।
सीमावर्ती जिले में पहली बार डिजिटल मॉडल पर आगे बढ़ रही स्व-गणना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। शुक्रवार इस प्रक्रिया का अंतिम दिन है और इसके साथ ही जिले में जनभागीदारी का नया प्रशासनिक मॉडल भी उभरकर सामने आया है। शुरुआती चरण में करीब 6700 मूल निवासियों ने स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज की, जबकि विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कार्मिकों को जोड़ने पर यह संख्या लगभग 10 हजार तक पहुंच गई है। सबसे खास बात यह रही कि जिला प्रशासन ने इसे डिजिटल सहभागिता अभियान की तरह संचालित किया। कलक्टर अनुपमा जोरवाल से लेकर विभागीय अधिकारियों तक ने स्वयं पोर्टल पर जानकारी भरी।
-देश में पहली बार बड़े स्तर पर डिजिटल स्व-जनगणना मॉडल
-घर बैठे ऑनलाइन डेटा एंट्री की सुविधा
-भविष्य की योजनाओं के लिए रियल टाइम डेटा तैयार
-प्रशासनिक पारदर्शिता और तेज डेटा प्रोसेसिंग
-ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल जागरूकता अभियान
सीमावर्ती और भौगोलिक रूप से विस्तृत जिले होने के बावजूद डिजिटल भागीदारी का स्तर प्रशासन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। रेगिस्तानी गांवों तक ऑनलाइन प्रक्रिया समझाने के लिए पंचायत स्तर पर अलग से जागरूकता गतिविधियां चलाई गईं। आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग ने विभिन्न विभागों, विशेषकर पुलिस प्रशासन और फील्ड स्टाफ से सीधे समन्वय किया। तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई गई ताकि डिजिटल प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा नहीं आए।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आगामी वर्षों में सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता सीधे डेटा की शुद्धता पर निर्भर करेगी। ऐसे में स्व-गणना केवल संख्या जुटाने का अभियान नहीं, बल्कि डेटा आधारित गवर्नेंस की नींव बनती जा रही है। डिजिटल जनगणना से तीन बड़े बदलाव होंगे—
-योजनाओं की सटीक टारगेटिंग
-फर्जी या डुप्लीकेट डेटा में कमी
-शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल योजनाओं की वास्तविक जरूरतों का आंकलन
युवाओं ने संभाला डिजिटल मोर्चा
ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। कई गांवों में युवाओं ने बुजुर्गों और डिजिटल साधनों से दूर लोगों को पोर्टल उपयोग करना सिखाया। इससे अभियान को सामाजिक सहयोग का स्वरूप मिला।
स्वगणना अभियान को लेकर सक्रिय प्रयास किए हैं। शुरुआती प्रयास अब रंग ला रहे हैं, जागरुकता भी दिख रही है। उम्मीद है कि शुक्रवार को अभियान के अंतिम दिन और अधिक संख्या में लोग भागीदारी निभाएंगे।
-राजेन्द्र मेघवाल, उपनिदेशक, सांख्यिकी एवं उप जिला जनगणना अधिकारी, जैसलमेर
प्रशासन का लक्ष्य अंतिम दिन तक अधिकाधिक नागरिकों को पोर्टल से जोड़ना है। यदि सरकारी कार्मिक स्वयं आगे आते हैं तो आमजन में विश्वास स्वतः बढ़ता है। जनगणना-2027 पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया है और इससे डेटा संग्रहण अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज बनेगा।
-अनुपमा जोरवाल, जिला कलक्टर, जैसलमेर