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‘साहब ‘ की अटकी गाड़ी तो 21 जनों के कट गए चालान

पोकरण कस्बे में बुधवार को उपखंड अधिकारी जब अपने वाहन से बाहर निकल रहे थे, इस दौरान सड़क पर खड़ी एक गाड़ी के कारण वे अटक गए।

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पोकरण कस्बे में बुधवार को उपखंड अधिकारी जब अपने वाहन से बाहर निकल रहे थे, इस दौरान सड़क पर खड़ी एक गाड़ी के कारण वे अटक गए। करीब 10 मिनट तक उन्हें इंतजार करना पड़ा। जिसके बाद यातायात पुलिस की ओर से उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर खड़े रहने वाले सभी वाहनों के चालान काटे गए। गौरतलब है कि जयनारायण व्यास सर्किल से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर कचहरी परिसर स्थित है। इस परिसर में उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, उपपंजीयन, उपकोष कार्यालय, उपकारागृह, न्यायालय स्थित है।

कार्यालय के बाहर स्थित रास्ता अंबेडकर सर्किल, रेलवे स्टेशन, आबकारी, डिस्कॉम व सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय, गुरुद्वारा जाता है। साथ ही रेलवे कॉलोनी, रामदेव कॉलोनी सहित आसपास क्षेत्र में घनी आबादी भी निवास करती है। इस मार्ग पर कचहरी परिसर के बाहर मालवाहक टैक्सियां, वाहन, ट्रैक्टर आदि खड़े रहते है। इनके लिए अन्य कहीं जगह आवंटित नहीं है। मुख्य चौराहे से नजदीक होने से वर्षों से ये वाहन यहीं खड़े रहते है।

एसडीएम की फंसी गाड़ी तो याद आई यातायात व्यवस्था

उपखंड अधिकारी बुधवार को दोपहर अपने कार्यालय से बाहर निकले और सरकारी गाड़ी से कहीं जा रहे थे। इस दौरान मुख्य द्वार के पास किसी व्यक्ति ने अपनी एक गाड़ी खड़ी कर दी। जिसके कारण उपखंड अधिकारी की सरकारी गाड़ी यहां से नहीं निकल पाई। उन्हें करीब 10 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। जिस पर उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना पर यातायात पुलिस प्रभारी पूरे लवाजमे के साथ यहां पहुंच गए और कचहरी परिसर के बाहर खड़े सभी वाहनों को हटाया। यही नहीं उनके चालान भी काटे। इस दौरान यहां खड़े 21 वाहनों के चालान काटे गए।

गलती किसी की, सजा किसी और को

कचहरी परिसर के मुख्य द्वार पर कोई निजी वाहन खड़ा था। जिसके चालक ने सही पार्क नहीं किया और समस्या उत्पन्न हुई। जबकि साहब की बेरुखी की सजा अन्य वाहनों के चालकों को भुगतनी पड़ी। यातायात पुलिस की ओर से यहां खड़े सभी मालवाहक व अन्य वाहनों के चालान काटे गए। जिसको लेकर वाहन चालकों ने रोष भी जताया।

नो-पार्किंग क्षेत्र, लेकिन वर्षों से यही व्यवस्था

करीब डेढ़ दशक पूर्व कचहरी परिसर के आगे खाली जगह को नो-पार्किंग क्षेत्र घोषित किया गया था। तत्कालीन उपखंड अधिकारी ने यहां पौधे लगाने के साथ खाली भूमि की तारबंदी कर यहां वाहनों को खड़ा नहीं करने के संदेश का बोर्ड भी लगाया गया था, लेकिन कुछ महिनों बाद ही तारबंदी तोड़ दी गई और यहां फिर वाहन खड़े होने लग गए। ऐसे में वर्षों से यहां खड़े हो रहे वाहनों की अब व्यवस्था भी बन चुकी है।