कार्यशाला में सिंचाई प्रबंधन पर चर्चा
नाचना. गांव के इंदिरा गांधी नहर कॉलोनी में स्थित विश्राम गृह में गुरुवार को सिंचित क्षेत्र में सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की सहभागिता पर कार्यशाला आयोजित की गई। बीकानेर से आए उपनिदेशक जगराम मीना ने क्षेत्र के जल उपभोक्ता प्रबंध समितियों के अध्यक्षों व सदस्यों को इस योजना के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने सहभागी सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की सहभागी, सिंचाई प्रबंधन से लाभ, सिंचाई प्रबंधन के तहत कृषक संगठनों का प्रारूप, कृषक संगठनों का गठन, सदस्यों का निर्वाचन, उपसमितियों का गठन, महिलाओं की भागीदारी, जल संसाधन विभाग की ओर से हस्तांतरण के समय जल उपयोक्ता संगम को दी जाने वाली पंजिकाएं व उनका संधारण, बैठक की प्रक्रिया, सिंचाई क्षेत्र का निर्धारण व राजस्व वसूली, नहरों का रख रखाव, किसानों के हितों में कार्य करवाना आदि विषयों पर जानकारी दी गई। इस मौके पर इंदिरा गांधी नहर परियोजना 28वां खंड के अधिशासी अभियंता सुरेशकुमार खींची, सहायक अभियंता संदीपकुमार, सहायक अभियंता मोमराज, कनिष्ठ अभियंता चेनाराम, इंफाल, सिंचाई पटवारी पोकरदास तथा जल उपयोक्ता प्रबंध समितियों के निर्वाचित अध्यक्ष खुशाल सोनी, अहमदखां, सांगसिंह, बरसलखां, गंगाराम, जमालधीन तथा समितियों के सदस्य किशनाराम, भाखरसिंह, गिरधरसिंह, जुगताराम, मांगीलाल आदि लोग उपस्थित थे।
नहीं है कार्यों की जानकारी
गौरतलब है कि सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की सहभागिता अधिनियम 2000 के तहत 20 जुलाई 2000 से इस योजना को लागू किया गया था। जिसके अंतर्गत नहरी क्षेत्र में जल उपयोक्ता प्रबंध समितियों का गठन किया गया। इन समितियों का पांच वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने वाला है, लेकिन इन समितियों के पदेन अधिकारियों तथा सदस्यों को अब तक न तो किसी प्रकार का दायित्व और न ही अधिकार दिए गए है। ऐसे में योजना अब तक कागजों में ही सीमित रह गई है। कार्यशाला का तो आयोजन किया गया, लेकिन धरातल पर कोई कार्य दिखाई नहीं दे रहा है। पांच वर्ष के कार्यकाल में जल अपयोक्ता प्रबंध समितियों को क्या दायित्व व अधिकार दिए गए है, इस बात का उपनिदेशक मीना भी अलग ही अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पुरानी बातें भूल जाओ, अब नए सिरे से कार्य शुरू करो।