फरवरी के दूसरे पखवाड़े के साथ ही क्षेत्र में गर्मी ने दस्तक दे दी है। सुबह और रात में हल्की सर्दी का असर बना हुआ है, लेकिन दिन में तेज धूप के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट की आशंका फिर गहराने लगी है।
फरवरी के दूसरे पखवाड़े के साथ ही क्षेत्र में गर्मी ने दस्तक दे दी है। सुबह और रात में हल्की सर्दी का असर बना हुआ है, लेकिन दिन में तेज धूप के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट की आशंका फिर गहराने लगी है।
बावजूद इसके, जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर धरातल पर ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही। हर वर्ष की तरह इस बार भी समय रहते प्रभावी योजना नहीं बनाई गई तो ग्रामीण क्षेत्रों में हालात गंभीर हो सकते हैं। पोकरण कस्बे सहित लगभग 200 गांवों में इंदिरा गांधी नहर के पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा कई गांव और ढाणियां नलकूप आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। गर्मी के मौसम में विद्युत भार बढ़ने से मोटरें ठप पड़ जाती हैं और जलापूर्ति प्रभावित होती है। दो माह की संभावित नहरबंदी स्थिति को और विकट बना देती है।
मरुस्थली क्षेत्र में तेज आंधी के दौरान विद्युत पोल और तार क्षतिग्रस्त होने से जलापूर्ति कई दिनों तक बाधित रहती है, जिससे पेयजल संकट गहरा जाता है। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि प्रशासनिक स्तर पर हर वर्ष टैंकरों से पानी आपूर्ति के लिए ठेका प्रक्रिया अपनाई जाती है, लेकिन प्रतिस्पर्धा में न्यूनतम दर पर ठेका लेने के बाद आपूर्ति नियमित और पर्याप्त नहीं हो पाती। कई गांवों में टैंकर कभी-कभार ही पहुंचते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को निजी ट्रैक्टर टंकियों से महंगे दामों पर पानी मंगवाना पड़ता है। पानी की कमी का असर मवेशियों पर भी पड़ता है और पशुपालकों की चिंता बढ़ जाती है।
केन्द्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत गांवों में पाइपलाइन बिछाकर घर-घर नल कनेक्शन देने का कार्य जारी है, लेकिन प्रगति अपेक्षित गति से नहीं हो रही। जानकारी के अनुसार योजना का कार्य अभी आधा भी पूरा नहीं हुआ है। क्षेत्रवासियों के अनुसार यदि समय रहते तैयारी और निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो गर्मी के चरम पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
उनके अनुसार नहरबंदी से पहले वैकल्पिक जलस्रोत सक्रिय किए जाएं, नलकूपों की मरम्मत सुनिश्चित हो, विद्युत आपूर्ति सुदृढ़ की जाए और टैंकर व्यवस्था की सख्त मॉनिटरिंग हो। समय पर प्रभावी कदम उठाए गए तो आमजन को राहत मिल सकती है, अन्यथा हर वर्ष की तरह इस बार भी पोखरण को पेयजल संकट से जूझना पड़ेगा।