राजस्थान पत्रिका के बाड़मेर-जैसलमेर संस्करण के 15वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की कड़ी में मंगलवार को क्षेत्र के लवां गांव में स्थित ऐतिहासिक जानकी तालाब व राधा-कृष्ण मंदिर के आसपास करीब 3 घंटे तक श्रम की बूंदें बही।
राजस्थान पत्रिका के बाड़मेर-जैसलमेर संस्करण के 15वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की कड़ी में मंगलवार को क्षेत्र के लवां गांव में स्थित ऐतिहासिक जानकी तालाब व राधा-कृष्ण मंदिर के आसपास करीब 3 घंटे तक श्रम की बूंदें बही। क्षेत्र के लवां गांव में पालीवाल समाज की ओर से वर्षों पूर्व जानकी तालाब खुदवाया गया था। तालाब का पानी शुद्ध व स्वच्छ होने से ग्रामीण वर्षों से उपयोग कर रहे है। पत्रिका के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित श्रमदान कार्यक्रम में मंगलवार को सुबह 8 बजे ही ग्रामीणों का यहां पहुंचना शुरू हो गया। समाजसेवी राजेन्द्रकुमार, चिरंजीलाल, संतोष पालीवाल, मेघसिंह जैमला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने यहां श्रमदान शुरू किया। इस दौरान ग्रामीणों में उत्साह नजर आया। करीब 3 घंटे तक चले श्रमदान अभियान से तालाब के घाटों का सौंदर्य खिल उठा।
गांव के बाबूलाल, कृष्णकांत पालीवाल, सीताराम शर्मा, आईबक्श, मोहनलाल, मूलचंद, ग्राम विकास अधिकारी हरिसिंह, दौलतराम कुमावत, हरिराम कुमावत, गणेशराम पालीवाल, नारायण, महेश, भैरुलाल, जगदीश पालीवाल, ओमप्रकाश, शंकराराम भील, जानेखां, नराराम, भोमाराम, मदन मेघवाल, माधाराम, खुशालाराम, बलराम, देवीलाल, अरुण, दिनेश पालीवाल, लवां पुलिस चौकी के कांस्टेबल रामखिलाड़ी सहित ग्रामीणों की ओर से घाटों व तालाब की सीढिय़ों पर जमा कचरे व गंदगी की सफाई कर श्रमदान किया और स्वच्छता का संदेश दिया। इस दौरान तालाब के घाटों पर लगी झाडिय़ों की भी कटाई की गई। श्रमदान के दौरान दो बच्चों ने भी तालाब के किनारे लगी झाडिय़ों की कटाई की और तालाब के आसपास जमा कचरे को बाहर निकाला।
राजेन्द्र कुमार पालीवाल ने राजस्थान पत्रिका के जल सरोकार से जुड़े अभियानों पर प्रकाश डाला और इन्हें आमजन के लिए प्रेरक बताया। संतोषकुमार पालीवाल व मेघसिंह जैमला ने कहा कि लोगों को ऐसे कार्यक्रमों से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने तालाबों, नाडियों पर समय-समय पर श्रमदान करने और उनका संरक्षण करने का आह्वान किया। गांव के चिरंजीलाल, आईबक्श, बाबूलाल पालीवाल ने पत्रिका के कार्यक्रमों की सराहना की।