तेजी से बढ़ते कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और डिजिटल तकनीक के दौर में जहां पढ़ाई के तरीके लगातार बदल रहे हैं, वहीं जैसलमेर में पारंपरिक पुस्तकालयों का महत्व एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।
तेजी से बढ़ते कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) और डिजिटल तकनीक के दौर में जहां पढ़ाई के तरीके लगातार बदल रहे हैं, वहीं जैसलमेर में पारंपरिक पुस्तकालयों का महत्व एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। शहर के सबसे प्रमुख स्थान हनुमान चौराहा क्षेत्र में राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय युवाओं के लिए नया अध्ययन केंद्र बनकर उभरा है। डिजिटल संसाधनों के साथ-साथ पुस्तकों की ओर बढ़ते रुझान ने यहां अध्ययन का माहौल जीवंत कर दिया है। विगत वर्षों में करीब 80 लाख रुपए की लागत से इस पुस्तकालय का आधुनिकीकरण किया गया है। इसमें एयर कंडीशनिंग, हाइ-स्पीड इंटरनेट, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, रीडिंग केबिन और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इन सुविधाओं ने खासतौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को आकर्षित किया है।
जानकारी के अनुसार, पहले जहां यहां रोजाना गिनती के लोग आते थे, वहीं अब प्रतिदिन 60 से 80 अभ्यर्थी नियमित रूप से अध्ययन के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह से शाम तक यहां सीटें भरी रहती हैं और कई बार प्रतीक्षा सूची तक बन जाती है। पुस्तकालय में राजस्थान प्रशासनिक सेवा, संघ लोक सेवा आयोग, शिक्षक भर्ती, बैंकिंग, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित नवीनतम पुस्तकों व सामग्री की उपलब्धता ने इसकी उपयोगिता को और बढ़ा दिया है। दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल पढ़ाई के बढ़ते प्रभाव के बावजूद युवा केवल मोबाइल या लैपटॉप पर निर्भर नहीं रहना चाहते। कई अभ्यर्थियों का मानना है कि पुस्तकालय का शांत वातावरण, अनुशासित माहौल और पुस्तकों के साथ पढ़ाई करने से एकाग्रता बेहतर होती है। साथ ही, यहां मिलने वाली विविध संदर्भ सामग्री ऑनलाइन माध्यमों से अधिक विश्वसनीय और व्यवस्थित मानी जा रही है।
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा राजेंद्रङ्क्षसह के अनुसार घर पर पढ़ाई के दौरान अक्सर ध्यान भटक जाता है, जबकि पुस्तकालय में लगातार पढ़ाई का माहौल बना रहता है। वहीं, छात्रा गरिमा का कहना है कि यहां इंटरनेट सुविधा होने से ऑनलाइन कंटेंट और ऑफलाइन किताबों का संतुलित उपयोग संभव हो पा रहा है, जो तैयारी को अधिक प्रभावी बनाता है। आने वाले समय में यहां और भी डिजिटल संसाधन जोड़े जा सकते हैं। सर्दी और गर्मी के मौसम अनुसार पुस्तकालय के समय में परिवर्तन किया जाता है।
जैसलमेर में अध्ययन का बदलता परिदृश्य यह संकेत देता है कि तकनीक के विस्तार के बावजूद पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि नए स्वरूप में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। जैसलमेर का यह पुस्तकालय इस बदलाव का सजीव उदाहरण बनकर उभरा है, जहां डिजिटल और पारंपरिक शिक्षा का संतुलन युवाओं के भविष्य को नई दिशा दे रहा है।
- मोहनलाल पुरोहित, सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी