हालत में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उन्हें जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल रेफर किया। यहां दो दिन चले इलाज के बाद सोमवार शाम को दिलीप कुमार का निधन हो गया। दिलीप कुमार की पत्नी सीमा नौ माह की गर्भवती थीं। घर में नए सदस्य के आने की प्रतीक्षा थी, लेकिन उसी घर में अचानक मातम पसर गया।
कभी-कभी जीवन अपनी सबसे कठोर और सबसे कोमल तस्वीरें एक ही दिन में दिखा देता है। लाठी कस्बे में दिलीप कुमार पुत्र तिलोकराम के घर ऐसा ही भावनात्मक और असाधारण संयोग सामने आया, जहां एक ही दिन में मृत्यु की चुप्पी और जन्म की किलकारी साथ-साथ गूंज उठी। 27 वर्षीय दिलीप कुमार पिछले सात दिनों से बुखार से पीडि़त थे। शुरुआत में परिजन उन्हें पोकरण राजकीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां तीन दिनों तक उपचार चला।
हालत में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उन्हें जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल रेफर किया। यहां दो दिन चले इलाज के बाद सोमवार शाम को दिलीप कुमार का निधन हो गया। दिलीप कुमार की पत्नी सीमा नौ माह की गर्भवती थीं। घर में नए सदस्य के आने की प्रतीक्षा थी, लेकिन उसी घर में अचानक मातम पसर गया। दिलीप की एक दो वर्षीय पुत्री भी है, जो अब अपने पिता की गोद और स्नेह से वंचित हो गई।
दिलीप कुमार का पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह लाठी गांव लाया गया। गांव के मोक्षधाम में सुबह लगभग नौ बजे अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान तिलोकराम सहित परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। वातावरण पूरी तरह शोक और सन्नाटे में डूबा रहा। अंतिम संस्कार के कुछ ही घंटों बाद किस्मत ने फिर करवट ली। सीमा को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन तत्काल उन्हें लाठी स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जांच के बाद चिकित्सा प्रभारी डॉ. विशेष थानवी ने स्थिति को देखते हुए उन्हें पोकरण राजकीय अस्पताल रेफर किया। पोकरण अस्पताल में उसी शाम सीमा ने एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया।
यह क्षण परिवार के लिए शब्दों से परे भावनात्मक स्थिति लेकर आया। जहां एक ओर घर में नई जिंदगी की शुरुआत हुई, वहीं दूसरी ओर उसी जीवन से जुड़ा एक रिश्ता हमेशा के लिए टूट चुका था। नवजात के जन्म के साथ घर में फिर से जीवन की आवाज लौट आई, लेकिन पिता दिलीप कुमार की अनुपस्थिति उस खुशी को अधूरा बना गई। परिवार में पहले से एक दो वर्षीय पुत्री है। अब दोनों बच्चों की जिम्मेदारी सीमा और दादा तिलोकराम पर आ गई है। परिवार की आजीविका दिलीप कुमार की छोटी दुकान पर निर्भर थी, जिसे वे स्वयं संभालते थे। इससे पूर्व दिलीप के निधन पर स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर संवेदना व्यक्त की और बाजार आधे दिन के लिए बंद रखकर शोक रखा।