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भगवान भरोसे जैसलमेर का यह अस्पताल, बुखार-दर्द की दवा तक नहीं, डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशान

जैसलमेर के फलसूंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुखार और दर्द की जरूरी दवाइयां खत्म हो गई हैं। रोज 200 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन दवा और डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों को निजी अस्पतालों व मेडिकल स्टोर का सहारा लेना पड़ रहा है।

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Jaisalmer hospital medicine crisis

जैसलमेर: फलसूंड (पोकरण) गांव के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में न चिकित्सक है, न ही दवाइयां। मरीजों को छोटे से छोटे उपचार के लिए भी जोधपुर जाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि जैसलमेर-बाड़मेर जोधपुर जिला सीमा पर स्थित फलसूंड तहसील मुख्यालय है और आसपास बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों, गांव व ढाणियां स्थित है। क्षेत्र के मरीजों की सुविधा के लिए गांव में राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित किया गया है।

अस्पताल में प्रतिदिन 200 से 250 मरीज अपने उपचार के लिए पहुंचते है, लेकिन यहां यहां सुविधाओं व व्यवस्थाओं की कमी के कारण यहां मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। उन्हें निजी अस्पतालों, नीम हकीमों अथवा जोधपुर या पोकरण जाकर उपचार करवाना पड़ रहा है। जिससे उन्हें परेशानी हो रही है।

बाजार से दवाइयां खरीदना मजबूरी

सरकार की ओर से मरीजों को निःशुल्क दवा वितरण के दावे किए जा रहे है, लेकिन फलसूंड गांव के राजकीय अस्पताल में इन दावों की पोल खुल रही है। अस्पताल में दर्द निवारक व बुखार जैसी दवाइयां ही नहीं है। इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या ज्यादा है। जबकि अस्पताल में रक्तचाप, दर्द निवारक, कैल्शियम जैसी आवश्यक दवाइयां नहीं होने के कारण मरीजों को बाजार का रुख करना पड़ता है। महंगी दवाइयों के कारण मरीजों को आर्थिक परेशानी से रुबरु होना पड़ रहा है।

चिकित्सकों की कमी

क्षेत्र का बड़ा अस्पताल होने और मरीजों की भीड़ को देखते हुए यहां पर्याप्त चिकित्सक भी नहीं है। अस्पताल में चिकित्सकों के 7 पद स्वीकृत स्वीकृत है, है लेकिन केवल 3 चिकित्सक कार्यरत है। जिसके कारण ओपीडी में मरीजों की लंबी कतारें लग रही है और दूर-दराज से आने वाले मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है एवं घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।

केवल एक एम्बुलेंस के भरोसे दर्जनों गांव

गांव के राजकीय अस्पताल में एक 108 एम्बुलेंस संचालित है। फलसूंड तहसील क्षेत्र विस्तृत भू-भाग में फैला हुआ है। करीब 20 से 30 गांवों के लोग उपचार के लिए यहां आते हैं। क्षेत्र में कहीं सड़क हादसा होने पर भी घायलों को यहीं लाया जाता है। केवल एक एम्बुलेंस पर्याप्त नहीं हो रही है। उसमें भी किसी गंभीर बीमारी, दुर्घटना या प्रसव के दौरान जोधपुर रैफर करने की स्थिति में घंटों तक मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। बावजूद इसके सरकार व चिकित्सा विभाग की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अस्पताल में दवाइयों की कमी को लेकर कई दिन पूर्व डिमांड भेजी गई है, लेकिन जिला स्तर से दवाइयां नहीं मिली है। एक-दो दिन में दवाइयां मिलने पर मरीजों को पर्याप्त वितरण किया जाएगा। चिकित्सकों की कमी को लेकर भी उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है। डॉ. नीरजकुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, फलसूंड