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जैसलमेर में खत्म होगा ट्रैफिक का झंझट, ₹15.5 करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट से बदलने वाली है शहर की सूरत

पर्यटन शहरों की असली चुनौती केवल बढ़ती आबादी या वाहनों की संख्या नहीं होती। बल्कि सीमित जगह के भीतर लगातार बढ़ती गतिविधियों को व्यवस्थित करना भी होता है। जैसलमेर अब इसी चुनौती को नई सोच से हल करने की तैयारी में दिखाई दे रहा है।

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Jaisalmer Smart Parking Project

महाराणा प्रताप मैदान स्थल, जहां पार्किंग का कार्य पूर्ण होने से सुधर सकेगी यातायात व्यवस्था (पत्रिका फोटो)

Jaisalmer Smart Parking Project: पर्यटन नगरी जैसलमेर में अब सड़कों पर लगने वाले जाम और पार्किंग की किल्लत से बड़ी राहत मिलने वाली है। शहर की ट्रैफिक संरचना को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए नगर परिषद ने 15.5 करोड़ रुपए की लागत से एक बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस नई शहरी अवधारणा (अर्बन कॉन्सेप्ट) के तहत पार्किंग का समाधान जमीन पर नहीं, बल्कि ऊंचाई में तलाशा जा रहा है।

बता दें कि यह प्रोजेक्ट न केवल गाड़ियों को खड़ी करने की जगह देगा, बल्कि इसे एक मल्टीयूज सिटी स्पेस के रूप में विकसित किया जाएगा।

महाराणा प्रताप मैदान में बनेगी मॉडर्न पार्किंग

जैसलमेर के मुख्य बाजार और पर्यटन स्थलों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए महाराणा प्रताप मैदान को चुना गया है। यहां बनने वाली आधुनिक पार्किंग में एक साथ 225 वाहनों को पार्क किया जा सकेगा।

नगर परिषद जैसलमेर के आयुक्त लजपाल सिंह सोढ़ा के अनुसार, इस नई पार्किंग सुविधा से स्थानीय वाहन चालकों और सैलानियों को बड़ी राहत मिलेगी। लोग अपने वाहन निर्धारित स्थान पर सुरक्षित खड़े कर आसपास के क्षेत्रों में पैदल भ्रमण का आनंद ले सकेंगे। जल्द ही यह सुविधा आमजन को उपलब्ध कराई जाएगी।

पार्किंग के साथ कैफे, शोरूम और रेस्टोरेंट का तड़का

  • इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टीयूज मॉडल है। यह सिर्फ एक पार्किंग ढांचा बनकर नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे दिन सक्रिय रहने वाला एक सार्वजनिक केंद्र (पब्लिक हब) बनाया जाएगा।
  • परिसर के भीतर मॉडर्न कैफे, प्रीमियम शोरूम और रेस्टोरेंट खोले जाएंगे।
  • इससे न केवल नगर परिषद को राजस्व मिलेगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को भी अतिरिक्त फुटफॉल (ग्राहकों की आवाजाही) का फायदा मिलेगा।

क्या है ग्राउंड रियलिटी? क्यों पड़ी इसकी जरूरत

शहरी नियोजन विशेषज्ञों और अर्बन मोबिलिटी अध्ययनों के आंकड़े बताते हैं कि जैसलमेर जैसे पर्यटन शहर के लिए यह कदम क्यों जरूरी था।

क्या है चुनौती और हकीकत?

  • एक वाहन सड़क किनारे खड़ा होने पर औसतन 10 से 15 वर्गमीटर सार्वजनिक स्थान घेरता है।
  • सीजन के दौरान बाहरी वाहनों की आमद कई गुना बढ़ जाती है, जिससे वास्तविक सड़क क्षमता घटती है।
  • अनियोजित पार्किंग से ट्रैफिक ठप होता है।

स्मार्ट पार्किंग से समाधान और असर

  • वाहन सड़क से हटेंगे तो पैदल चलने वालों और स्थानीय बाजारों के लिए अधिक खुला स्पेस मिलेगा।
  • 225 वाहनों की क्षमता वाला यह नया हब इस अतिरिक्त दबाव को पूरी तरह सोख लेगा।
  • व्यवस्थित पार्किंग होने से शहर के ट्रैफिक प्रवाह में 15 से 25 प्रतिशत तक सुधार संभव है।

ग्राउंड लेवल पर क्या बदल जाएगा जैसलमेर?

बाजार क्षेत्रों में सड़क किनारे अव्यवस्थित खड़े होने वाले वाहन गायब हो जाएंगे।
सोनार किला और आसपास के मुख्य पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगी।
सड़कों पर कब्जे कम होने से स्थानीय निवासियों और सैलानियों को पैदल चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ और खुला माहौल मिलेगा।

सीमित भूमि वाले ऐतिहासिक और पर्यटन शहरों के लिए भविष्य का रास्ता यही है। जैसलमेर का यह मॉडल साबित करता है कि आने वाले समय में शहर केवल चौड़ी सड़कों से नहीं, बल्कि ऐसे स्मार्ट और संतुलित मॉडल्स से चलेंगे जहां पार्किंग, आर्थिक गतिविधियां और पर्यटन एक ही छत के नीचे जुड़े हों।