जैसलमेर

Jaisalmer: पीवणा सांप के डसने से पति-पत्नी की मौत के बाद भय, अनजाने में विषहीन रेड सैंड बोआ बन रहा शिकार

पीवणा सांप के डसने से हुई पति-पत्नी की मौत के बाद बाड़मेर-जैसलमेर क्षेत्र में सांपों को लेकर डर बढ़ गया है। इस दहशत में ग्रामीण विषहीन रेड सैंड बोआ (बोगी का बच्चा) को भी पीवणा समझकर मार रहे हैं। गलत पहचान के कारण दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण पर संकट मंडराने लगा है।
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Jul 20, 2026
jaisalmer photo
रेड सैंड बोआ

लाठी (जैसलमेर). बाड़मेर जिले के सेड़वा थाना क्षेत्र के फागलिया गांव में करीब एक माह पहले पीवणा (कॉमन करैत) के डसने से पति-पत्नी की मौत के बाद बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में सांपों को लेकर भय का माहौल बना हुआ है। इस दहशत का असर अब वन्यजीव संरक्षण पर भी दिखाई देने लगा है। ग्रामीण गलत पहचान के कारण विषहीन रेड सैंड बोआ (स्थानीय नाम बोगी का बच्चा या दोमुंहा) को पीवणा समझकर मार रहे हैं। इससे इस दुर्लभ प्रजाति के अस्तित्व पर खतरा बढ़ता जा रहा है। स्नेक कैचर विक्रम कुमार बताते हैं कि हाल के दिनों में जैसलमेर, बाड़मेर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रेड सैंड बोआ के बच्चों को पीवणा समझकर मारने की कई घटनाएं सामने आई हैं। लोगों में यह भ्रांति है कि रेत में मिलने वाला हर छोटा और मोटा सांप पीवणा होता है, जबकि दोनों प्रजातियां पूरी तरह अलग हैं।

पीवणा अत्यंत विषैला, रेड सैंड बोआ विषहीन

पीवणा, जिसे वैज्ञानिक नाम कॉमन करैत से जाना जाता है, देश के सबसे विषैले सांपों में शामिल है। इसका शरीर चमकदार काला या गहरा नीला होता है, जिस पर पतली सफेद धारियां होती हैं। यह अधिकतर रात में सक्रिय रहता है और खेतों, झाडिय़ों तथा घरों के आसपास छिपा रहता है। इसके विष का असर सीधे तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। इसके विपरीत रेड सैंड बोआ पूरी तरह विषहीन और शांत स्वभाव का सांप है। स्थानीय भाषा में इसे बोगी का बच्चा या दोमुंहा कहा जाता है। इसका शरीर मोटा, बेलनाकार तथा हल्के भूरे या लाल-भूरे रंग का होता है। गोल पूंछ के कारण लोग इसे दोमुंहा समझ लेते हैं। यह रेत के भीतर रहता है तथा चूहे, छिपकलियां और अन्य छोटे जीव खाकर खेतों में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बिना उकसावे इंसानों पर हमला नहीं करता।

गलत पहचान से संरक्षण पर खतरा

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि करैत के डर से लोग बिना पहचान किए हर सांप को मार रहे हैं। इसका सबसे अधिक नुकसान रेड सैंड बोआ जैसी दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति को हो रहा है। यह प्रजाति पहले से ही कम संख्या में पाई जाती है और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

जागरूकता ही सबसे प्रभावी उपाय

किसी भी सांप के दिखाई देने पर उसे मारने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें और वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें। सही पहचान और जागरूकता से न केवल मानव जीवन सुरक्षित रहेगा, बल्कि दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण भी संभव हो सकेगा।

-नरपतसिंह राजपुरोहित, पर्यावरण प्रेमी

दोनों सांपों का अंतर

पीवणा (कॉमन करैत): अत्यंत विषैला, रात में सक्रिय, काला या गहरा नीला शरीर, सफेद धारियां, काटने पर जान का गंभीर खतरा।

रेड सैंड बोआ : पूरी तरह विषहीन, शांत स्वभाव, मोटा लाल-भूरा शरीर, रेत में रहने वाला, चूहों की संख्या नियंत्रित कर खेती को लाभ पहुंचाने वाला।

Updated on:
21 Jul 2026 03:32 pm
Published on:
20 Jul 2026 08:44 pm