- गोशाला संचालकों व पशुपालकों का हो रहा बेहाल
पोकरण. क्षेत्र में गांवों को अभावग्रस्त घोषित कर दिया गया है तथा भीषण गर्मी व अकाल के दौरान चारे की कमी हो रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक क्षेत्र में चारा डिपो शुरू नहीं किए गए है। जिसके कारण पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। गौरतलब है कि सरकार की ओर से पोकरण व भणियाणा तहसील क्षेत्र को अभावग्रस्त घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों से ग्राम पंचायतों, ग्राम सेवा सहकारी समितियों व दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से पशु शिविरों व चारा डिपो के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए गए है। प्रशासन की ओर से कुछ दिन पूर्व पशु शिविर शुरू करने की एक सूची जारी की गई है, लेकिन अभी तक क्षेत्र में एक भी चारा डिपो शुरू नहीं किया गया है। जिसके कारण क्षेत्र के पशुपालकों को महंगे दामों में चारा खरीदना पड़ रहा है। पशुपालकों ने बताया कि ग्वार फलकटी 800 से 900, तूड़ी 750 से 850, मूंगफली की चार 800 से 900, चना चार 600 से 700 व खारिया कुतर 900 से 1000 रुपए प्रतिक्विंटल के भाव से मिल रहा है। ऐसे में महंगे दामों में पशुपालकों के लिए चारा खरीदना मुश्किल हो रहा है। जिससे उन्हें परेशानी हो रही है।
पशुधन को बचाना चुनौतीपूर्ण
जैैसलमेर गोसेवा समिति के जिलाध्यक्ष पेहपसिंह राठौड़ ने बताया कि स्थानीय स्तर पर चारे का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो रहा है। ऐसे में गंगानगर, पंजाब आदि स्थानों से चारा मंगवाना पड़ रहा है। जिसके कारण ऊंचेदामों में मिलावटी व कम गुणवत्ता का चारा गोशाला संचालकों व पशुपालकों तक पहुंच रहा है। जिससे पशुधन की मृत्युदर बढ़ती जा रही है। गेहूं चारे की नई फसल आने के बाद भी पर्याप्त चारा नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जिलेभर में गोशाला संचालकों व पशुपालकों के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में पशुपालक अपने पशुओं को खुला छोडऩे के लिए मजबूर हो रहे है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से गोवंश संरक्षण व संवर्धन के लिए दी जाने वाली सहायता राशि का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है, न ही पशुपालकों के लिए सस्ती दर पर चारे की व्यवस्था की गई है। उन्होंने अभावग्रस्त क्षेत्रों में पशु शिविर व चारा डिपो शुरू करने की मांग की है।