कोटा में 1009 की क्षमता के मुकाबले 1527 बंदी मौजूद हैं, जो 151 प्रतिशत से अधिक ओक्यूपेंसी को दर्शाता है। जयपुर में 1173 के सामने 1614 बंदी और अजमेर में 960 के मुकाबले 1179 बंदी हैं। जोधपुर में 1475 की क्षमता के सामने 1727 बंदी दर्ज किए गए हैं। उधर, जिला जेलों की स्थिति भी निराशाजनक है।
प्रदेश की जेल व्यवस्था इस समय क्षमता से अधिक बंदियों को संभाले हुए हैं। उपलब्ध ताजा आंकड़े बताते हैं कि कुल क्षमता से अधिक बंदी विभिन्न जेलों में रखे जा रहे हैं, जिससे ओक्यूपेंसी 103 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है। जानकारों के मुताबिक उक्त सांख्यिकीय स्थिति के कारण रोजमर्रा की व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर मशक्कत करनी पड़ रही है। सबसे अधिक दबाव केंद्रीय जेलों में दर्ज हो रहा है।
कोटा में 1009 की क्षमता के मुकाबले 1527 बंदी मौजूद हैं, जो 151 प्रतिशत से अधिक ओक्यूपेंसी को दर्शाता है। जयपुर में 1173 के सामने 1614 बंदी और अजमेर में 960 के मुकाबले 1179 बंदी हैं। जोधपुर में 1475 की क्षमता के सामने 1727 बंदी दर्ज किए गए हैं। उधर, जिला जेलों की स्थिति भी निराशाजनक है। डीग में 175 की क्षमता के सामने 503 बंदी दर्ज किए गए, जिससे ओक्यूपेंसी 287 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसी तरह बालोतरा, जालोर, राजसमंद और सवाई माधोपुर में 150 प्रतिशत से अधिक बंदी मौजूद हैं। जैसलमेर में भी 150 की क्षमता के सामने 153 बंदी दर्ज हैं। इसी तरह सब जेलों का परिदृश्य सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है। भीम में 7 के मुकाबले 17, सांचौर में 27 के मुकाबले 60 और रामगंज मंडी में 40 के मुकाबले 86 बंदी मौजूद हैं। कई स्थानों पर क्षमता से दुगुने से अधिक बंदी रखे जा रहे हैं। इससे बैरकों में भीड़, संसाधनों की कमी और सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।
प्रदेश स्तर पर जेलों में बंदियों की कुल क्षमता लगभग 24 हजार 100 है, जबकि बंदियों की संख्या 24 हजार 900 से अधिक पहुंच चुकी है। इनमें 6 हजार 656 सजायाफ्ता और 18 हजार से अधिक विचाराधीन बंदी शामिल हैं। विचाराधीन बंदियों की बढ़ती संख्या के कारण जेलों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
विशेष और उच्च सुरक्षा श्रेणी की जेलों में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित बनी हुई है, वहीं ओपन कैंप में भीड़ कम है। इसके बावजूद समग्र रूप से कारागार प्रणाली पर बढ़ता दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
कुल क्षमता: लगभग 24,100
कुल बंदी: लगभग 24,940
ओक्यूपेंसी: 103 प्रतिशत से अधिक
सजायाफ्ता बंदी: 6,656
विचाराधीन बंदी: 18,000 से अधिक
कोटा केंद्रीय जेल: 151 प्रतिशत ओक्यूपेंसी
डीग जिला जेल: 287 प्रतिशत ओक्यूपेंसी
-केंद्रीय जेलों में सबसे अधिक दबाव
-जिला और सब जेलों में ओवरक्राउडिंग
-विचाराधीन कैदियों की संख्या अधिक
-संसाधनों और सुरक्षा पर बढ़ता दबाव
अधिवक्ता अरविंद गोपा का कहना है कि क्षमता से अधिक बंदी होने पर बैरकों में भीड़ बढ़ती है, जिससे स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़े जोखिम बढ़ जाते हैं। ओपन जेल व्यवस्था, नई जेलों का निर्माण और मौजूदा ढांचे का विस्तार भी प्राथमिकता से हो, ताकि संतुलित और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।