जैसलमेर

Jaisalmer: स्वर्णनगरी को मिलेगी नई पहचान…1.27 करोड़ की लागत से बनेगा जैसलदेव स्मारक

स्वर्णनगरी में प्रवेश करने वाले पर्यटकों का स्वागत अब शहर के संस्थापक महारावल जैसलदेव की भव्य स्मारक स्थल से होगा। जोधपुर मार्ग स्थित रामगढ़ बाइपास पर करीब 1.27 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस स्मारक के निर्माण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। छह माह में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट जैसलमेर की ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति और पर्यटन पहचान को नए आयाम देने वाला माना जा रहा है।
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Jul 02, 2026
jaisalmer fort
जैसलमेर शहर का विहंगम दृश्य।

जैसलमेर. देश-दुनिया में अपनी स्वर्णिम धरोहर और ऐतिहासिक पहचान के लिए प्रसिद्ध जैसलमेर अब शहर के प्रवेश द्वार से ही पर्यटकों का मन मोहने की तैयारी में है। जोधपुर मार्ग पर रामगढ़ बाइपास पर सडक़ के किनारे स्वर्णनगरी के संस्थापक महारावल जैसलदेव के स्मारक निर्माण की तैयारी अंतिम चरण में है। नगरपरिषद ने इसके लिए करीब 1.27 करोड़ रुपए की लागत वाले कार्य करवाने के लिए निविदा प्रक्रिया की है और आने वाले दिनों में अंतिम दरों का निर्धारण कर कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा। यह कार्य छह माह की अवधि में पूरा करना होगा। यह केवल एक सौंदर्यीकरण परियोजना नहीं, बल्कि जैसलमेर की नई पहचान गढऩे वाला महत्वाकांक्षी प्रयास माना जा रहा है। इसके साकार होने पर शहर में प्रवेश करते ही पर्यटकों को स्वर्णनगरी के इतिहास, स्थापत्य, संस्कृति और गौरव का अहसास होगा। नगरपरिषद की ओर से स्मारक स्थल पर खूबसूरत बगीचा, प्लेटफार्म, दीवारें और अन्य कार्य करवाए जाएंगे। प्रतिमा लगवाने का काम संबंधित संस्था या व्यक्ति करेंगे। माना जाता है कि यहां जैसलदेव की अश्वारूढ़ प्रतिमा की स्थापना कर जैसलमेर जैसे ऐतिहासिक शहर की स्थापना कर उन्हें भावपूर्ण ढंग से याद किया जाएगा।

ऐतिहासिक विरासत मय आधुनिक विकास

इस परियोजना का उद्देश्य जैसलमेर की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक शहरी विकास के साथ जोडऩा है। प्रवेश स्थल पर बनने वाले स्मारक में पीले पत्थर की पारंपरिक वास्तुकला, राजस्थानी शिल्पकला और स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों को प्रमुखता दी जाएगी। वहीं महारावल जैसलदेव का भव्य स्मारक शहर के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक बनेगा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे का माध्यम भी बनेगा।

पर्यटन की पहली छाप होगी यादगार

- पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर की पहली छवि उसके प्रवेश क्षेत्र से बनती है। अभी तक जैसलमेर पहुंचने वाले पर्यटकों को ऐसा कोई भव्य स्वागत स्थल नहीं मिलता, जो शहर की ऐतिहासिक गरिमा को पहली नजर में प्रस्तुत कर सके।

- प्रस्तावित स्मारक इस कमी को दूर करेगा। यहां विकसित होने वाला परिसर पर्यटकों के लिए सेल्फी और फोटोग्राफी का नया आकर्षण बनेगा, जिससे सोशल मीडिया के माध्यम से भी जैसलमेर की वैश्विक पहचान को मजबूती मिलेगी।

- परियोजना के तहत इस पूरे क्षेत्र का समग्र विकास किया जाएगा। आकर्षक लैंडस्केपिंग, हरित पट्टियां, सजावटी प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधा, पार्किंग, पेयजल, सार्वजनिक शौचालय, सूचना संकेतक और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

- बीते कुछ वर्षों में जैसलमेर में पर्यटन का तेजी से विस्तार हुआ है। नए होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन गतिविधियों के कारण देश-विदेश से पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में शहर के प्रवेश क्षेत्र का विश्वस्तरीय स्वरूप विकसित करना जैसलमेर की ब्रांडिंग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

- यह परियोजना शहर की पहचान को केवल किले और हवेलियों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि प्रवेश स्थल को भी पर्यटन मानचित्र पर नई जगह दिलाएगी।

- विशेषज्ञों का मानना है कि विरासत आधारित विकास और आधुनिक शहरी सुविधाओं का संतुलन ही भविष्य के पर्यटन शहरों की पहचान बनेगा। प्रस्तावित प्रवेशद्वार और महारावल जैसलदेव स्मारक इसी सोच का प्रतीक है।

स्मारक स्थल का होगा निर्माण

जैसलमेर के संस्थापक का भव्य स्मारक स्थल का निर्माण और विकास करवाया जाएगा। इस निर्माण से स्वर्णनगरी की ऐतिहासिक गरिमा को नया सम्मान मिलेगा, पर्यटन उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी। आने वाले वर्षों में जैसलमेर एक अधिक व्यवस्थित, आकर्षक और विश्वस्तरीय पर्यटन शहर के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकेगा।

- लजपालसिंह सोढ़ा, आयुक्त, नगरपरिषद जैसलमेर

Published on:
02 Jul 2026 08:26 pm