- 5000 से अधिक दुपहिया वाहन है पोकरण क्षेत्र में- 300 से अधिक सडक़ दुर्घटनाएं प्रतिवर्ष होती है पोकरण क्षेत्र में- 100 से अधिक बाइक सवार होते है हर साल घायल
पोकरण. सरकार की ओर से आमजन को हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित तो किया जा रहा है, लेकिन इस पर ही जीएसटी लगा दिए जाने से अब लोगों का मोहभंग हो रहा है। गौरतलब है कि 2017 में केन्द्र सरकार की ओर से जीएसटी लागू की गई। जिसके अंतर्गत कई वस्तुओं पर केन्द्र व राज्य कर लगाया गया। गत दिनों सरकार की ओर से एक आदेश जारी कर हेलमेट पर भी जीएसटी लगा दी गई। ऐसे में अब आमजन के लिए हेलमेट खरीदना महंगा हो गया है।
18 फीसदी लगेगी जीएसटी
सरकार की ओर से दुपहिया वाहन चालकों को अच्छी गुणवत्ता के आईएसआई मार्के का हेलमेट लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिसके चलते दुपहिया वाहन चालकों को अनुदानित अथवा सस्ती दर पर हेलमेट उपलब्ध करवाने चाहिए। जबकि सरकार की ओर से हेलमेट जैसी जीवनरक्षक वस्तु पर जीएसटी लगाई गई है। सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार हेलमेट पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगी। वैसे, सडक़ सुरक्षा के अंतर्गत बाइक चालकों को हेलमेट लगाना आवश्यक है, ताकि दुर्घटना होने पर सिर में चोट नहीं लगे। इसके लिए पुलिस की ओर से जनजागरण किया जाता है तथा कई बार भामाशाहों व स्वयंसेवी संगठनों की ओर से हेलमेट नि:शुल्क वितरण भी किए जाते है। पुलिस की ओर से हेलमेट नहीं लगाने पर दुपहिया वाहन चालकों के चालान भी काटे जाते है।
खबरदार नकली हेलमेट बेचा तो...
सरकार की ओर से एक आदेश जारी कर दुकानदारों को आईएसआई मार्के का हेलमेट विक्रय करने के लिए पाबंद किया गया है। गौरतलब है कि कम गुणवत्ता का हेलमेट दुर्घटना के दौरान टूट जाता है तथा व्यक्ति को चोट लगने की आशंका बनी रहती है। इसी को लेकर सरकार की ओर से आईएसआई मार्के का हेलमेट रखने के आदेश दिए गए है। इस आदेश के अंतर्गत यदि आईएसआई मार्के का हेलमेट विक्रय नहीं किया जाता है, तो दुकानदार को जेल अथवा जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।