जैसलमेर

Jaisalmer: कागजों में गुम हो गई हरियाली… गायब हो गए पौधे, पोकरण-फलसूंड मार्ग पर लगने थे 12 हजार पौधे

हरियाली का सपना लेकर शुरू हुई पौधरोपण योजना अब जमीन पर नजर नहीं आ रही। पोकरण-फलसूंड राजमार्ग पर लगाए गए सैकड़ों पौधे गायब, योजना सिर्फ कागजों तक सिमटी। पर्यावरण संरक्षण की पहल में लापरवाही ने हरित अभियान पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2 min read
Jul 21, 2026
ai photo
ai photo

पोकरण. राज्य राजमार्ग संख्या 40 पोकरण-फलसूंड मार्ग पर पौधरोपण की योजना कागजों में गुम हो गई है। हालात यह है कि मौके पर लगाए गए 300 से अधिक पौधे भी गायब है। गौरतलब है कि गत वर्ष जुलाई माह में सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से पोकरण-फलसूंड मार्ग के किनारे पौधरोपण की योजना बनाई गई थी। हरियाली को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से प्रदेश के कई राज्य राजमार्गों को पौधरोपण के लिए चिन्हित किया गया था। जिसके अंतर्गत पोकरण-फलसूंड राजमार्ग पर भी पौधरोपण किया जाना था। पोकरण से फलसूंड की दूरी करीब 70 किलोमीटर है। बीच में आबादी क्षेत्रों को छोड़ते करीब 50 किलोमीटर सड़क पर पौधरोपण का निर्णय लिया गया था।

कागजों में छाई हरियाली, धरातल पर सूखा

विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर हजारों रुपए की राशि आवंटित की गई। इस राशि से 60 किलोमीटर में करीब 12 हजार पौधे लगाने थे। जबकि कार्यकारी एजेंसी की ओर से केेवल 300 पौधे लगाए गए। साथ ही उनके लिए न तो पानी की व्यवस्था की गई है, न ही सुरक्षा की। ऐसे में ये 300 पौधे भी गायब हो चुके है।

... और हो गई कर्तव्य की इतिश्री

पौधरोपण योजना बनाने, निविदा प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद पौधरोपण की शुरुआत भी हुई, लेकिन यह केवल औपचारिकता ही रही। पौधों की सुरक्षा के साथ उनको विकसित करने को लेकर भी कोई कार्य नहीं किया गया। जिसके कारण लगाए गए 300 पौधे नष्ट हो चुके है। जबकि अन्य पौधे लगे ही नहीं।

सवाल जो मांगते हैं जवाब

- योजना के तहत पौधों की खरीद, खुदाई, रोपण व सुरक्षा के नाम पर जारी बजट का उपयोग हुआ या नहीं?

- पौधे लगाने के बाद निगरानी की क्या व्यवस्था थी?

- यदि पौधरोपण नहीं किया गया तो संबंधित कार्यकारी एजेंसी के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई?

- लगाए गए पौधों के रख-रखाव और सुरक्षा व निगरानी का जिम्मा किसका था?

- क्या कागजों में पौधरोपण दिखाकर सरकारी धनराशि का दुरुपयोग हुआ है?

जवाब देने से कतरा रहे जिम्मेदार

इस संबंध में पोकरण सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से लगातार कई दिनों तक संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से फोन नहीं उठाया गया। कार्यालय जाने पर भी वे मिले नहीं।

Updated on:
21 Jul 2026 08:58 pm
Published on:
21 Jul 2026 08:58 pm