
जैसलमेर में अतिक्रमण का 'रिटर्न गेम' रोकने के लिए प्रभावी प्रयासों की दरकार।
जैसलमेर. शहर में अतिक्रमण अब केवल कब्जे का मामला नहीं, बल्कि 'रिटर्न गेम' बनता दिखाई दे रहा है। कार्रवाई के समय सरकारी जमीन खाली होती है, लेकिन निगरानी कमजोर पड़ते ही वही स्थान फिर कब्जों की जद में आने लगते हैं। परिणाम यह कि प्रशासनिक अभियान का प्रभाव कुछ सप्ताह या महीनों तक सीमित रह जाता है, जबकि सार्वजनिक भूमि पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। शहर के कई हिस्सों में सड़क किनारे, नालों, खाली भूखंडों, पार्कों के आसपास और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर दोबारा निर्माण सामने आ रहे हैं। इससे यातायात, जल निकासी, स्वच्छता, पार्किंग और भविष्य की विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
- कार्रवाई के बाद निगरानी कमजोर पड़ते ही दुबारा कब्जे।
-अस्थायी निर्माण तेजी से स्थायी स्वरूप लेने लगते।
-सार्वजनिक भूमि का रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर बढ़ता।
-विकास परियोजनाओं की लागत और समय दोनों प्रभावित।
-नगर प्रबंधन का बड़ा हिस्सा बार-बार एक ही कार्रवाई में खर्च।
-तेज शहरीकरण के साथ सार्वजनिक भूमि पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
-वर्ष 2036 तक देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने का अनुमान।
-शहरी आबादी बढ़ने के साथ भूमि की मांग भी लगातार बढ़ रही।
-विशेषज्ञ मानते हैं कि सबसे अधिक दबाव सड़क, पार्क, नाले, सरकारी भूखंड और सार्वजनिक उपयोग वाली जमीन पर पड़ता है।
-एक ही स्थान पर बार-बार कार्रवाई प्रशासनिक संसाधनों की अतिरिक्त खपत बढ़ाती है।
बार-बार लौटते अतिक्रमण केवल जमीन नहीं घेरते, बल्कि शहर की विकास क्षमता भी सीमित करते हैं।
-नई सड़क परियोजनाएं प्रभावित।
-जल निकासी व्यवस्था बाधित।
-आपातकालीन सेवाओं की पहुंच मुश्किल।
-पार्किंग संकट बढ़ता।
निवेश और शहरी सौंदर्यीकरण प्रभावित।
अतिक्रमण हटने के बाद नियमित फील्ड निरीक्षण की दरकार है। दुबारा कब्जा होने पर त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही तय की जानी चाहिए। एक बार हटाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है दोबारा कब्जा नहीं होने देना।महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं कि कितने अतिक्रमण हटे, बल्कि यह है कि कार्रवाई के छह महीने बाद कितनी सरकारी जमीन आज भी पूरी तरह मुक्त है। यही आंकड़ा किसी भी अभियान की वास्तविक सफलता तय करता है।
फतेहगढ़. जिले के ग्राम कोड़ियासर में सूखे के कारण पशुधन पर गहरा संकट मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत की मांग की है। ग्राम निवासी ओमप्रकाश दर्जी ने बताया कि इस वर्ष क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से भीषण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। पशुओं के लिए चारे और पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों, जिनमें तेजाराम, ओमप्रकाश, देवीलाल और प्रकाश दर्जी शामिल हैं, ने बताया कि गायें और अन्य पशु भूख, प्यास तथा भीषण गर्मी से लगातार कमजोर हो रहे हैं। कई पशु इतने दुर्बल हो चुके हैं कि एक बार बैठ जाने के बाद उठ भी नहीं पा रहे और उनकी मृत्यु हो रही है। यह दृश्य पूरे गांव के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।
Updated on:
21 Jul 2026 08:39 pm
Published on:
21 Jul 2026 08:39 pm
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