दशहरा से लेकर दिवाली से ठीक पहले तक बंगाली सैलानियों का सीजन फीका जाने से फिक्रमंद जैसलमेर के पर्यटन व्यवसाय को पड़ोसी प्रांत गुजरात के बाशिंदों ने दिवाली सीजन में अब तक सम्बल प्रदान कर दिया है। दिवाली के दूसरे दिन से शुरू हुई गुजराती सैलानियों की भीड़ रविवार को भैया दूज के मौके पर परवान पर नजर आई और हजारों की संख्या में गुजराती पर्यटक स्वर्णनगरी की धरा पर भ्रमण करने पहुंचे।
दशहरा से लेकर दिवाली से ठीक पहले तक बंगाली सैलानियों का सीजन फीका जाने से फिक्रमंद जैसलमेर के पर्यटन व्यवसाय को पड़ोसी प्रांत गुजरात के बाशिंदों ने दिवाली सीजन में अब तक सम्बल प्रदान कर दिया है। दिवाली के दूसरे दिन से शुरू हुई गुजराती सैलानियों की भीड़ रविवार को भैया दूज के मौके पर परवान पर नजर आई और हजारों की संख्या में गुजराती पर्यटक स्वर्णनगरी की धरा पर भ्रमण करने पहुंचे। शहर से लेकर सम के धोरों तक च्जीजेज् नम्बर वाली गाडिय़ों की रेलमपेल से पर्यटन से जुड़े व्यवसायी बम-बम हैं। गुजरात के अलावा राजस्थान के विभिन्न शहरों व दिल्ली, हरियाणा आदि राज्यों के पर्यटक भी घूमने पहुंच रहे हैं। मौजूदा समय में हजारों सैलानियों के सैलाब से पीत पाषाणों से निर्मित स्वर्णनगरी खचाखच भर गई है और जैसलमेर के अनेक होटलों से लेकर सम-खुहड़ी के रिसोट्र्स में नो रूम के हालात बन गए हैं। शहर के अच्छे रेस्टोरेंट्स में तो सैलानियों को खाने-पीने के लिए वेटिंग करनी पड़ रही है।
सैलानियों के लाए गए वाहनों से शहर के तीनों पार्किंग स्थल छोटे पड़ गए हैं और जगह-जगह सडक़ों के किनारे वाहन खड़े किए जा रहे हैं। इसके अलावा बाहरी क्षेत्र की सडक़ों से लेकर भीतरी भागों में मार्ग जाम हो रहे हैं। इन जगहों पर बार-बार जाम लगने से यातायात व्यवस्था चरमरा रही है। टैक्सियों व कारों तथा बसों के आमने-सामने आ जाने से काफी देर तक पैदल राहगीरों से लेकर दुपहिया वाहन चालकों को मार्ग सुगम होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
हर बार दिवाली के अगले रोज यानी गोवद्र्धन पूजा के दिन से गुजराती सैलानी जैसलमेर में उमड़ पड़ते हैं, इसमें इस बार दिवाली दो अलग-अलग दिनों में मनाए जाने से थोड़ी देरी हुई। अपार भीड़ का मंजर गत शनिवार को नजर आया और रविवार को इसमें और बढ़ोतरी हो गई। शहर में जहां भी देखो, वहां देशी सैलानी ही दिखाई दे रहे हैं। पर्यटन स्थलों के अलावा शहर के बाजारों व गलियों-मोहल्लों तक में दिन से रात तक चहल-पहल का मंजर बना हुआ है। गुजराती सैलानी इतनी तादाद में आए हैं कि स्वर्णनगरी एक तरह से मिनी गुजरात ही बन गया है। सैलानियों की तरफ से गुजराती भाषा में आपसी बातचीत के माहौल में कई बार लगता है कि राजस्थान का यह सीमांत शहर गुजरात में शुमार हो गया है।
सैलानियों की भारी भीड़ की वजह से सबसे ज्यादा यातायात जाम की स्थिति ऐतिहासिक सोनार दुर्ग की घाटियों में देखने को मिल रही है। सुबह 10 बजे से सायं करीब 4 बजे तक दुर्ग की घाटियों में चढऩा-उतरना मुश्किल हो गया है। अखे प्रोल के बाहर से ही हजारों सैलानियों के अंदर-बाहर होने के कारण जाम के हालात बनने शुरू होते हैं, जो दुर्ग के पूरे मार्ग से लेकर दशहरा चौक तक में नजर आते हैं। सैलानियों के साथ स्थानीय लोगों को आवाजाही में सबसे ज्यादा दिक्कत सूरज प्रोल, गणेश प्रोल व हवा प्रोल में पेश आ रही है। सोनार किला स्थित म्यूजियम, हवेलियों और सिटी व्यू पॉइंट से लेकर जैन मंदिर, लक्ष्मीनाथ मंदिर व अन्य गलियों में भरपूर सैलानी नजर आ रहे हैं। इसी तरह से कलात्मक पटवा हवेलियों के अंदर-बाहर भारी भीड़ का नजारा दिखा। सैलानियों में पीत पाषाणों से निर्मित ऐतिहासिक स्थलों पर फोटोग्राफी करने का आकर्षण सर्वाधिक नजर आ रहा है। इसके अलावा सम के लहरदार धोरों में ऊंट व जीप सफारी करना उन्हें खूब रास आ रहा है। सूर्यास्त के समय धोरों में जहां तक नजर जा रही है, पर्यटक ही दिखाई दे रहे हैं। शहर के सैकड़ों साल प्राचीन कलात्मक गड़ीसर सरोवर और दर्शनीय पटवा हवेलियों का भ्रमण तथा वहां अलग-अलग स्थानों पर फोटोग्राफी करने का क्रेज जबर्दस्त बना हुआ है। पर्यटकों की इतनी तादाद में आवक से समूचे पर्यटन क्षेत्र को अच्छा व्यवसाय मिल रहा है।