
पोकरण/लाठी. क्षेत्र के भादरिया गांव के पास स्थित ओरण में आधा दर्जन से अधिक मिले दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों के शवों से सनसनी फैल गई तथा सूचना पर वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बिखरे शवों को एकत्र कर अपने कब्जे में लिया। गौरतलब है कि लाठी, भादरिया, धोलिया, खेतोलाइ, ओढाणिया, चांधन, सोढाकोर सहित आसपास का क्षेत्र पशु बाहुल्य क्षेत्र है। यहां मात्र एक भादरिया गौशाला में ही 25 से 30 हजार पशुधन है। इसके अलावा पशुपालकों के पास भी बड़ी संख्या में गायें, ऊंट, भेड़, बकरियां आदि होने के कारण मृत पशुओं को जंगलों में डाला जाता है। यहां उन मृत पशुओं के शवों को अपना आहार बनाने के लिए बड़ी संख्या में गिद्ध भी पाए जाते है। हालांकि अब गिद्धों की संख्या कम रह गई है तथा यह प्रजाति लुप्तप्राय हो रही है। लाठी, भादरिया के पास वन विभाग का बहुत बड़ा आरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां अन्य प्रजाति के विभिन्न पशु पक्षी जंगल में स्वच्छंद विचरण करते है। ऐसे में यहां आए दिन चिंकारा हरिण, लोमड़ी, नील गाय, खरगोश जैसे जंगली जानवर तथा गोडावण, बाज, गिद्ध जैसे विभिन्न प्रजातियों के पशु पक्षियों के शव मिलते रहे है।
वन्य प्रेमियों में रोष
भादरिया गांव के पास स्थित ओरण में गुरुवार को सुबह अखिल भारतीय जीवरक्षा विश्रोई सभा के तहसील संयोजक राधेश्याम पेमाणी सहित कुछ वन्यजीवप्रेमी वन्यजीवों को देखने के लिए निकले हुए थे। इस दौरान उन्हें ओरण में क्षत विक्षत हालात में करीब आधा दर्जन गिद्धों के शव बिखरे पड़े मिले। जिस पर उन्होंने इसकी सूचना लाठी स्थित वन विभाग के कार्मिकों को दी। सूचना पर क्षेत्रीय वन अधिकारी धीराराम मेघवाल, वनरक्षक देवीसिंह, बागेखां, तगसिंह, बागसिंह सहित कार्मिक मौके पर पहुंचे तथा गिद्धोंं के बिखरे शवों को एकत्र कर उन्हें भादरिया स्थित पशु चिकित्सालय लेकर आए। यहां पशु चिकित्साधिकारी डॉ.सुभाष ने बताया कि शव काफी पुराने हो चुके है। इसलिए उनका पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता।
कर रहे अनुसंधान
मौके पर मिले सबूतों के अनुसार गिद्धों की मौत कहीं अन्यत्र हुई है तथा शवों को भरकर भादरिया ओरण में लाकर डाला गया है। मौके पर दो-तीन लोगों के पद चिह्न भी मिले है। विभाग की ओर से अनुसंधान किया जा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग को मेडिकल बोर्ड गठित कर शवों के पोस्टमार्टम के लिए पत्र लिखा गया है। बोर्ड की रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा।
धीराराम मेघवाल, क्षेत्रीय वन अधिकारी, वन विभाग लाठी।