सीमावर्ती जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कभी पेयजल का प्रमुख सहारा रहे अनेक हैंडपंप आज रखरखाव के अभाव में जमीदोज होने की कगार पर पहुंच गए हैं। जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के चलते बड़ी संख्या में हैंडपंप नाकारा साबित हो रहे हैं, जिससे भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर पोकरण उपखंड और रामदेवरा क्षेत्र में स्थिति गंभीर है, जहां खराब पड़े हैंडपंप लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।

जैसलमेर/रामदेवरा. सीमावर्ती जिले में घर-घर नल कनेक्शन से पहले विभिन्न गांवों और ढाणियों में चुनिंदा जगहों पर लगे कई हैंडपंप वर्तमान में जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते जमीदोज होने की कगार पर है। उसके बावजूद जिम्मेदारों की ओर से ली जा रही उदासीनता की गहरी तंद्रा नहीं टूट रही है। जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का प्रमुख आधार रहे कई हैंडपंप रखरखाव के अभाव में नाकारा हो चुके हैं।
जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के कारण हैंडपंप जमीदोज होकर शोपीस बन गए हैं, जिससे भीषण गर्मी और जल संकट के बीच आम जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। पिछले करीब ढाई दशकों में हैंडपंपों के जमींदोज होने और खराब होने के पीछे घटते भूजल स्तर और उचित रखरखाव की कमी मुख्य कारण हैं। जहां सरकार हर घर जल और नलों से पानी पहुंचाने के मिशन में जुटी है, वहीं ग्रामीण इलाकों में सूखे और खराब हैंडपंपों से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या जैसलमेर जिले के पोकरण उपखंड क्षेत्र और विशेषकर रामदेवरा इलाके में कहीं अधिक है। इसके अलावा तथ्य यह भी है कि जैसलमेर क्षेत्र से ज्यादा हैंडपंप पोकरण इलाके में स्थापित किए हुए हैं।
रामदेवरा क्षेत्र में स्थित विभिन्न वार्डों में भीषण गर्मी के चलते समय पर जलापूर्ति नहीं हो रही है। जिसके चलते क्षेत्र के लोगों को निजी पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। वही घर-घर नल कनेक्शन के बावजूद उनमें जलापूर्ति ठप्प रहने से पानी नहीं आ रहा है। भीषण गर्मी में दैनिक कार्यों में पानी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में हैंडपंप अगर चालू हालत में रहते तो स्थानीय बाशिंदों के लिए काफी राहत होती।
रामदेवरा में हनुमान मंदिर के पास, रावणा राजपूत धर्मशाला के पास, आइस फैक्टी के पास, आदर्श विद्यालय के पास आदि स्थानों पर हैंड पंप देखरेख के अभाव में नाकारा पड़े है। हैंड पंपों के पास पशु खेलिया भी बनी होती थी,आज भी कई हैंड पंपों के पास बनी हुए है। जिसमें पानी भरा होने पर पशुओं को भी पीने को पानी मिल जाता था। जिम्मेदारों की उदासीनता से क्षेत्र के हैंड पंपों की हालत खस्ताहाल बनी हुई हैं।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सूत्रों के अनुसार कुल 78 नाकारा और 62 हैंडपम्प खराब बताए गए हैं। इस तरह से बंद हैंडपंप कुल 140 हैं।
क्षेत्र में ऐसे हैंडपंप जो पूरी तरह से नकारा हो गए हैं, उनका सर्वे करवाया जा रहा है। सर्वे के बाद उन्हें हटाने की कार्रवाई की जाएगी। जिस जगह हैंडपंप खराब है, वहां मरम्मत कर सुचारू करने का कार्य किया जा रहा है।
- रामनिवास रैगर, अधिशासी अभियंता जलदाय विभाग, पोकरण