रामदेवरा क्षेत्र के एक परिवार ने 12 महीने तक पाले गए अनाथ हिरण के बच्चे को वन विभाग को सौंप दिया। परिवार ने उसे बेटे की तरह विदाई दी।
रामदेवरा क्षेत्र के एक परिवार ने 12 महीने तक पाले गए अनाथ हिरण के बच्चे को वन विभाग को सौंप दिया। परिवार ने उसे बेटे की तरह विदाई दी। यह घटना वन्यजीव प्रेम और मानवता की मिसाल पेश करती है। वही इस दौरान परिवार के बच्चों की रुलाई फूट पड़ी। रामदेवरा के सोहनसिंह की ढाणी के पास रहने वाले बंशीलाल भील के परिवार ने करीब 12 महीने पहले हिरणी और उसके बच्चे को जंगली कुत्तों ने घेर कर घायल कर दिया। घायल हिरणी की मौत हो गई थी,लेकिन उसके बच्चे को परिवार ने बचाकर 12 महीने लगातार बच्चे की तरह पालन पोषण किया। इन 12 महीनों में हिरण को घर में रखी बकरी का दूध पिलाया गया।
सोमवार को हिरण का बच्चा बंशीलाल भील के घर से वन विभाग वाले ले जाने लगे तो बच्चों की रुलाई फूट पड़ी। पिछले 12 महीनों से परिवार के बच्चे हिरण को बाबू के नाम से पुकार कर उसको स्नेह करते रहे। हिरण का बच्चा भी इंसानों के प्यार से उनके साथ काफी घुल मिल गया था। जब हिरण को वन विभाग को सौंपा गया तो बच्चों के साथ बड़ो की भी आंखे नम हो गई। हिरण को बंशीलाल भील की बड़ी लड़की दुर्गा जो कक्षा 9 में पढ़ती है उसे छोटे भाई की तरह दुलार करती। परिवार के अन्य 3 बच्चे भी हिरण के प्रति अगाध प्रेम रखते है।
बंशीलाल भील ने बताया कि उनकी ढाणी के पास मिले हिरण के बच्चे को उन्होंने बच्चे की तरह पाला है। 12 महीने तक उसकी सुरक्षा को लेकर हर समय सावधानी रखनी पड़ रही थी। अब हिरण बड़ा हो चुका है तो कोई जंगली श्वान इसे शिकार न बनाए। इसके लिए परिवार के साथ राय मशविरा के बाद हिरण को वन्य जीव प्रेमी धर्मेंद्र पूनिया, राजूराम खिलेरी, बशीर खान और वन विभाग की उपस्थिति में वन विभाग को सौंपा गया।
रामदेवरा कस्बे के नाचना रोड पर नथमल पानादेवी धर्मशाला के सामने खड़ी बसों के कारण मंगलवार को सड़क चलते एक बच्चे को बाइक सवार ने टक्कर मार दी। हादसे में मासूम हिम्मत सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया जिसके कारण उसे पोकरण जिला हॉस्पिटल से जोधपुर रैफर किया गया। हादसे में घायल बच्चे का अभी जोधपुर में इलाज जारी है।