
सूरज की तपिश, तेज हवाएं और साल के करीब नौ महीने रहने वाली गर्मी...ये सभी परिस्थितियां जैसलमेर को देश का सबसे अनुकूल सौर ऊर्जा केंद्र बनाती हैं। यही कारण है कि सरकारों के साथ निजी क्षेत्र ने इस संभावना को पहचाना और अरबों रुपए की लागत से यहां देश के सबसे बड़े सौर और पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में राजस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है और जैसलमेर इस परिवर्तन का केंद्र बन चुका है। विडंबना यह है कि जिस जिले से पूरे देश को बिजली आपूर्ति के सपने साकार हो रहे हैं, वहीं के लोग खुद बिजली संकट से जूझ रहे हैं। सोलर पावर हब बनने के बावजूद जैसलमेर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अघोषित कटौती आम बात हो गई है। डिस्कॉम कार्यालयों में शिकायतों का अंबार लगता रहता है, लेकिन समाधान अब भी दूर नजर आता है। भीषण गर्मी के मौसम में जब बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब आपूर्ति में बाधा की समस्या और विकट हो जाती है।
क्षेत्र में इस समय कई नामी कंपनियों के सौर ऊर्जा संयंत्र संचालित हो रहे हैं। नोख क्षेत्र में बड़ा पावर प्लांट स्थापित हुआ है, जिसकी क्षमता 925 मेगावाट है और 190 मेगावाट उत्पादन बीते वर्ष ही शुरू हो चुका था। नेड़ान-मूलाना में 1500 मेगावाट के सोलर पार्क सहित लाठी, धूड़सर, बडलीचारण और फतेहगढ़ क्षेत्रों में भी सौर संयंत्रों का कार्य व्यापक पैमाने पर जारी है। पोकरण क्षेत्र में 3500 एकड़ में फैले सौर ऊर्जा प्लांट पर 21 हजार करोड़ रुपए की लागत से विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। सोलर प्लांट में 975 मेगावाट विद्युत उत्पादन होना है। यह प्लांट पोकरण क्षेत्र के रामपुरिया, भिणाजपुरा, हस्तिनापुर व मसूरिया गांवों में करीब 3500 एकड़ में फैला हुआ है। परियोजना से सालाना 2490 मिलियन यूनिट्स विद्युत का उत्पादन किया जाएगा। इसी तरह से पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी जैसलमेर अग्रणी है। राजस्थान में कुल करीब 5000 मेगावाट पवन ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, तो उसमें से 4 हजार मेगावाट से अधिक उत्पादन अकेले जैसलमेर और बाड़मेर में होता है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को इस ऊर्जा क्रांति का प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- जैसलमेर शहर के विभिन्न इलाकों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक में बिजली कटौती एक सामान्य समस्या बन चुकी है। कई गांवों में गर्मी के दिनों में दिन के समय 6 से 8 घंटे तक बिजली नहीं रहती, वहीं रात में भी अघोषित कटौती जारी रहती है। इसका असर व्यावसायिक गतिविधियों, अस्पतालों और स्कूलों के कामकाज पर भी साफ दिखाई देता है।
- डिस्कॉम कार्यालयों में रोजाना कई शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन जवाब अक्सर एक जैसा होता है—लाइन में फॉल्ट है, लोड ज्यादा है या मरम्मत कार्य जारी है। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती है।
- अगर स्थानीय स्तर पर उत्पादित बिजली का स्थानीय उपयोग सुनिश्चित किया जाए तो बात बन सकती है। साथ ही वितरण नेटवर्क को आधुनिक बनाना, डिस्कॉम में जवाबदेही तय करना और सोलर कंपनियों के सीएसआर फंड के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू सौर संयंत्र स्थापित करना जरूरी है।
एक्सपर्ट व्यू -
जैसलमेर बिजली उत्पादन का बड़ा केंद्र बन चुका है। कई बार अति उत्पादन की स्थिति में शटडाउन लेना पड़ता है, लेकिन डिस्कॉम की मॉनिटरिंग व्यवस्था कमजोर होने के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ती है। कई पद रिक्त हैं। इनमें शहर व ग्रामीण इलाके शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर नए जीएसएस की आवश्यकता भी है।
- महेन्द्र बिस्सा, सेवानिवृत्त विद्युत अभियंता
Published on:
05 May 2026 07:59 pm
बड़ी खबरें
View Allजैसलमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
