सरहदी जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में लगातार बढ़ती गर्मी केवल शारीरिक नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। तापमान के बढ़ते स्तर के साथ लोगों में चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और थकान जैसे लक्षण तेजी से सामने आ रहे हैं।
सरहदी जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में लगातार बढ़ती गर्मी केवल शारीरिक नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। तापमान के बढ़ते स्तर के साथ लोगों में चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और थकान जैसे लक्षण तेजी से सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार हीटवेव का सीधा प्रभाव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर पड़ता है, जिससे व्यवहार में बदलाव और तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है।
पत्रिका पड़ताल में यह सामने आया है कि शहर के अस्पतालों और क्लीनिकों में पिछले एक माह के दौरान मानसिक थकान और नींद से जुड़ी समस्याओं के मामलों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेष रूप से युवा वर्ग इस समस्या से अधिक प्रभावित हो रहा है, जहां लंबे समय तक मोबाइल और स्क्रीन के संपर्क में रहना, अकेलापन और दिनचर्या का असंतुलन स्थिति को और गंभीर बना रहा है। गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी मानसिक अस्थिरता को बढ़ाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार गर्म वातावरण में रहने से व्यक्ति की सहनशीलता घटती है और छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया तीव्र हो जाती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि गर्मी के इस दौर में पर्याप्त पानी पीना, दिनचर्या संतुलित रखना और मानसिक शांति के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।
-नींद पूरी नहीं होना, बार-बार जागना
- मामूली बातों पर गुस्सा आना
-काम में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
-अत्यधिक थकान और ऊर्जा की कमी
-योग और ध्यान केंद्रों में भीड़ बढ़ी
-कूलिंग गतिविधियों जैसे स्विमिंग की मांग बढ़ी
-डिजिटल डिटॉक्स अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ी
मनोचिकित्सक डॉ. रामसिंह बताते हैं कि हीटवेव के दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव एक वास्तविक और गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अत्यधिक गर्मी से शरीर में शरीर में पानी की कमी बढ़ती है, वहीं कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो तनाव और चिंता को बढ़ाता है। लगातार गर्म वातावरण में रहने से नींद प्रभावित होती है, जिससे मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। युवा वर्ग में यह असर अधिक दिख रहा है, क्योंकि उनका स्क्रीन टाइम ज्यादा है और सामाजिक संपर्क कम हो रहा है। सुझाव है कि लोग दिन में कम से कम 7–8 घंटे की नींद लें, पर्याप्त पानी पिएं, और दिनचर्या में योग व ध्यान को शामिल करें। ठंडे वातावरण में समय बिताना भी मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
केस 1 -
जैसलमेर शहर के हनुमान चौराहा क्षेत्र में दुकान संचालित करने वाला युवक पिछले कुछ दिनों से लगातार चिड़चिड़ापन और अनिद्रा की समस्या से जूझ रहा है। परिजनों के अनुसार पहले शांत स्वभाव का यह युवक अब छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगा है। रात में कई बार नींद टूटने से दिन भर थकान बनी रहती है। चिकित्सकीय परामर्श में सामने आया कि अत्यधिक गर्मी और लगातार मोबाइल उपयोग ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया है, जिससे व्यवहार में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है।
केस 2 :
गड़ीसर प्रोल क्षेत्र की 35 वर्षीय महिला गृहिणी को पिछले दो सप्ताह से अत्यधिक थकान और मानसिक बेचैनी की शिकायत है। घर के कार्यों के बीच ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया है। परिवार बताता है कि पहले वह सक्रिय और प्रसन्न रहती थीं, लेकिन अब जल्दी परेशान हो जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार तेज गर्मी में शरीर में पानी की कमी और नींद का बाधित होना इसकी मुख्य वजह है, जिससे मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है और व्यवहार में बदलाव नजर आ रहा है।
केस 3 :
पोकरण मार्ग पर रहने वाला 19 वर्षीय छात्र परीक्षा की तैयारी के दौरान मानसिक दबाव और अनिद्रा का सामना कर रहा है। दिनभर गर्मी और रात में भी राहत नहीं मिलने से उसकी दिनचर्या पूरी तरह बिगड़ गई है। मोबाइल पर अधिक समय बिताने के कारण नींद और प्रभावित हो रही है। परिजनों के अनुसार वह पहले से अधिक चुप और तनावग्रस्त रहने लगा है। विशेषज्ञों ने इसे हीटवेव और स्क्रीन टाइम के संयुक्त प्रभाव का परिणाम बताया, जो युवाओं में तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है।
केस 4 :
शहर के एक निजी कार्यालय में कार्यरत 42 वर्षीय कर्मचारी को पिछले एक माह से काम में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और अत्यधिक थकान महसूस हो रही है। सहकर्मियों के अनुसार वे छोटी बातों पर असामान्य प्रतिक्रिया देने लगे हैं। चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि लगातार गर्म वातावरण में काम करने और पर्याप्त पानी न पीने से यह स्थिति बनी है। डॉक्टरों का कहना है कि हीटवेव के दौरान शरीर और मन दोनों पर दबाव बढ़ता है, जिससे कार्यक्षमता और मानसिक स्थिरता प्रभावित होती है।