
रामदेवरा. धार्मिक नगरी रामदेवरा में स्थित पवित्र रामसरोवर तालाब की पाल पर वर्षों से अधूरी सिद्धि कलश वाटिका योजना को अब नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। करीब दो दशक से उपेक्षा का शिकार रही इस महत्वाकांक्षी योजना को केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत प्रस्तावित बाबा रामदेव मंदिर के समग्र विकास कार्यों में शामिल किया गया है। इससे इस स्थल का सौंदर्यीकरण और विकास कर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनाया जाएगा। हाल ही में राजस्थान परियोजना विकास निगम (PDCOR) की विशेषज्ञ टीम ने बाबा रामदेव ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ मंदिर परिसर और रामसरोवर क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने को लेकर गहन विचार-विमर्श कर आवश्यक सुझाव लिए गए। योजना के तहत रामसरोवर की उत्तरी दिशा में स्थित सिद्धि कलश वाटिका का भी समग्र विकास किया जाएगा।
सिद्धि कलश वाटिका की परिकल्पना वर्ष 2006-07 में तत्कालीन जैसलमेर जिला कलक्टर एवं वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव केके पाठक ने की थी। उनका उद्देश्य था कि बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को विश्राम, आध्यात्मिक जानकारी और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव एक ही स्थान पर मिल सके। योजना के तहत सुंदर पार्क, बाबा रामदेव के जीवन चरित्र से जुड़ी जानकारी, जैसलमेर के पीले पत्थरों से निर्मित आकर्षक चार गुंबद तथा उनके मध्य एक सिद्धि कलश स्थापित किया गया था। श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार इस कलश में दान भी कर सकते थे।
तत्कालीन जिला कलक्टर के स्थानांतरण के बाद योजना की रफ्तार थम गई। समय के साथ असामाजिक तत्वों ने कई बार सिद्धि कलश को क्षतिग्रस्त किया और अंततः वह पूरी तरह नष्ट हो गया। वर्तमान में कलश का मलबा तक मौजूद नहीं है। वहीं पीले पत्थरों से बने कई स्तंभ, गुंबद और अन्य निर्माण भी टूट-फूट का शिकार हो चुके हैं। लंबे समय तक यह स्थल असामाजिक तत्वों का अड्डा बना रहा, लेकिन प्रशासन की ओर से इसकी सुध नहीं ली गई।
दिसंबर 2020 में प्रभारी सचिव के रूप में रामदेवरा दौरे पर आए केके पाठक ने भी सिद्धि कलश वाटिका के नए सिरे से सौंदर्यीकरण और विकास के निर्देश दिए थे, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसके बावजूद योजना धरातल पर आगे नहीं बढ़ सकी और वर्षों तक उपेक्षा झेलती रही। गौरतलब हैकि रामदेवरा देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख श्रद्धालु बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन करने पहुंचते हैं। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं के ठहरने या परिवार के साथ कुछ समय बिताने के लिए किसी विकसित पार्क या मनोरम स्थल का अभाव रहा है। सिद्धि कलश वाटिका के विकसित होने से यह कमी दूर होगी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
-50 लाख श्रद्धालु प्रतिवर्ष आते हैं रामदेवरा
-5 लाख रूपए का सहयोग दिया ग्राम पंचायत ने
-जैसलमेर से 120 किलोमीटर दूर स्थित है रामदेवरा
सिद्धि कलश योजना का हाल ही में पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण किया है। विभाग की ओर से योजना का विस्तार किया जाएगा। इससे रामदेवरा आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और इसका लाभ मिल सकेगा।
— समंदरसिंह तंवर, प्रशासक एवं निवर्तमान सरपंच, ग्राम पंचायत रामदेवरा