
जैसलमेर. जिले के सबसे बड़े जवाहिर चिकित्सालय में महज शोपीस बना है आग बुझाने में काम आने वाला सेटअप।
जैसलमेर. पर्यटन नगरी जैसलमेर में जिला अस्पताल सहित कई सरकारी और सार्वजनिक भवनों की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पत्रिका टीम की ओर से की गई पड़ताल में व्यवस्थाओं में फायर सेफ्टी सिस्टम की कमियां और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियां सामने आई हैं। उन्होंने आग लगने की घटनाओं की त्वरित रोकथाम व्यवस्था पकी पोल खोल दी है। सबसे चिंता की बात यह है कि जिन भवनों में हर दिन सैकड़ों लोग आते-जाते हैं, वहां आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां नहीं के बराबर है। जिला अस्पताल जवाहिर चिकित्सालय जैसे संवेदनशील संस्थान में यदि आग लग जाए तो मरीजों, परिजनों और कर्मचारियों की जान बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
जिला अस्पताल में मरीजों की भारी आवाजाही रहती है। यहां मरीजों को भर्ती करके भी उनका उपचार किया जाता है। अस्पताल परिसर में फायर सेफ्टी सिस्टम की कार्यक्षमता, नियमित जांच और रखरखाव को लेकर गंभीर कमियां हैं। आग बुझाने वाले यंत्रों की स्थिति, अलार्म सिस्टम की उपलब्धता और आपातकालीन निकास मार्गों के उपयोग को लेकर सवाल उठे हैं। जानकारों के अनुसार जवाहिर चिकित्सालय में लगभग 10 साल पहले अग्निशमन के लिए पाइप लाइन और अन्य मशीनरी फिट की गई, लेकिन मौजूदा समय में वे केवल शोपीस ही बने हुए हैं। किसी हादसे के समय ये उपकरण किसी काम के नहीं हैं।
मामला केवल जिला अस्पताल तक सीमित नहीं है। पड़ताल में कई सार्वजनिक भवनों और संस्थानों के साथ छोटे व मझोले होटलों से लेकर कपड़े आदि के शोरूम में भी फायर सेफ्टी मानकों के पालन को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। कई जगहों पर फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं है और कहीं वे केवल नाममात्र के हैं। शहर में बहुमंजिला इमारतें, होटल, कार्यालय और भीड़भाड़ वाले भवन लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्थाओं की गति उसी अनुपात में मजबूत नहीं दिख रही। ऐसे में एक छोटी सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है।
जैसलमेर में हर वर्ष लाखों पर्यटक आते हैं। जिला अस्पताल, सरकारी कार्यालय और सार्वजनिक भवन, होटल आदि आमजन के भरोसे का केंद्र हैं। यदि इन स्थानों पर फायर सेफ्टी व्यवस्था ही सवालों के घेरे में हो तो चिंता स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को जहां कमी मिले, वहां समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही नियमित मॉक ड्रिल, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और उपकरणों की तकनीकी जांच अनिवार्य बनाई जाए। देश के कई शहरों में अस्पतालों और व्यावसायिक भवनों में आग लगने की घटनाएं दर्दनाक सबक दे चुकी हैं। जैसलमेर को उन घटनाओं से सीख लेकर अभी से व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी, क्योंकि बाद में सिवाय पछतावे के कुछ भी हाथ में नहीं आता।
नगरपरिषद जैसलमेर की तरफ से पिछले दिनों शहर में व्यापक अभियान चला कर अग्निशमन व्यवस्थाओं की कमी को लेकर 200 से ज्यादा संस्थानों, होटल, प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। कइयों को दो से तीन बार नोटिस दिए जा चुके हैं, अब भी उन्होंने सुधार नहीं किया तो आने वाले दिनों में फायर सेफ्टी उपायों की अनदेखी करने पर प्रदेश के अन्य शहरों की भांति भवनों व प्रतिष्ठानों आदि को सीज करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- केपी सिंह राठौड़, अग्निशमन प्रभारी, नगरपरिषद जैसलमेर
Updated on:
13 Jul 2026 08:41 pm
Published on:
13 Jul 2026 08:41 pm
