
जैसलमेर. जिले के खुहड़ी थाना अंतर्गत कोरवा गांव में विवाहिता को जला कर मारने के आरोपी पति, ससुर, सास और जेठानी को दस्तयाब कर पूछताछ की जा रही है। उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने इस संबंध में हत्या का मामला दर्ज किया है। खुहड़ी थानाधिकारी भागुराम ने बताया कि पूर्व में यह मामला हत्या के प्रयास से संबंधित धारा में दर्ज किया गया था, लेकिन एक दिन पहले विवाहिता हिना पुत्री पुरखाराम की उपचार के दौरान मौत हो जाने के बाद हत्या का प्रकरण बनाया गया। गौरतलब है कि गत 21 सितम्बर की रात विवाहिता को उसके ससुराल वालों पर पेट्रोल डाल कर जिंदा जलाने का आरोप लगाया गया। उसे गम्भीर हालत में जैसलमेर उपचार के लिए लाया गया, बाद में जोधपुर रेफर किया गया। जहां इलाज के दौरान विवाहिता ने दम तोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार मृतका के परिवारजनों ने आरोप लगाया कि पुश्तैनी जमीन हड़पने के लिए हिना की जेठानी ने उसे धोखे से गर्भपात की दवाइयां और संदिग्ध चीजें दी, जिससे उसका स्वास्थ्य खराब हो गया। उन्होंने आरोप लगाया गया कि मायके से कार लाने के लिए भी उसे प्रताडि़त किया जाता था। इस संबंध में माणपिया गांव निवासी मृतका के पिता सरकारी शिक्षक पुरखाराम भील की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया गया है। बताया गया कि हिना की शादी 29 जून 2012 को कोरवा निवासी भगवानाराम से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग हिना को शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। गत 21 सितंबर की रात करीब एक बजे के बाद आरोपियों ने कथित रूप से हिना पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग में वह 90 फीसदी से ज्यादा झुलस गई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
जैसलमेर @ पत्रिका. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीनस्थ टिड्डी-सह-एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र ने बुधवार को जैसलमेर जिले के ब्रह्मसर गांव में असली व नकली कीटनाशकों की पहचान पर जागरूकता अभियान आयोजित किया। इस दौरान किसानों को खेती में असली और नकली कीटनाशकों की पहचान तथा उनके सही इस्तेमाल की जानकारी दी गई। प्रभारी अधिकारी अमित कुमार मीणा ने प्राकृतिक खेती के महत्त्व और मित्र कीटों के संरक्षण हेतु सीमित कीटनाशक उपयोग पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिक सहायक पवन सिंह पनौरा ने किसानों को कीटनाशक खरीदते समय पैकिंग, सील, लीफलेट की जांच करने, पंजीकरण व बैच नंबर से उत्पाद की पहचान करने तथा क्यूआरकोड स्कैन कर जानकारी प्राप्त करने की सलाह दी। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपायरी डेट और जीएसटी बिल लेने की अनिवार्यता भी बताई। वैज्ञानिक सहायक विकाश कुमार मीना ने ट्राइकोडर्मा से बीज और भूमि उपचार की जानकारी देते हुए रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग अंतिम उपाय के रूप में करने पर जोर दिया। उन्होंने बुवाई से पहले बीज व मृदा उपचार के साथ खरीफ फसलों के कीटों व रोगों और कपास की गुलाबी सुंडी की निगरानी व रोकथाम के उपाय भी बताए। कार्यक्रम में कृषि सखीया लीला, रामू, ममता सहित कई किसान व ग्रामीण मौजूद रहे।