
जैसलमेर. शहर की समस्याएं केवल बजट और निर्माण कार्यों से दूर नहीं होतीं, उनके समाधान की शुरुआत वार्ड स्तर पर होती है। नागरिकों की शिकायत सुनने, समस्या की प्राथमिकता तय करने और संबंधित विभाग से जवाब मांगने तक पार्षद की भूमिका अहम है। इसी जिम्मेदारी को केंद्र में रखकर राजस्थान पत्रिका की ओर से रविवार को नगरपरिषद कार्यालय में ‘सेवा का संकल्प’ कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में पार्षदों के अधिकारों, कर्तव्यों और कामकाज की प्रक्रिया के साथ जनसमस्याओं के समाधान को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
कार्यशाला का फोकस पार्षदों को केवल पद की जिम्मेदारियों से परिचित कराना नहीं, बल्कि वार्ड की जरूरतों को समझकर काम करने की कार्यशैली विकसित करना रहा। नागरिकों की अपेक्षाएं जानने, स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता देने, संबंधित विभागों से समन्वय करने और समाधान की प्रगति पर नजर रखने की जरूरत बताई गई। सभापति विजय डांगरा, उपसभापति मधुबाला चौहान, नगरपरिषद आयुक्त पवन कुमार और पूर्व सभापति हरिवल्लभ कल्ला अतिथि के रूप में मौजूद रहे। एक दर्जन से अधिक पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी चर्चा में भाग लिया।
नगरपरिषद सभापति विजय डांगरा ने कहा कि शहर का समुचित विकास बोर्ड के सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है। शहरवासियों ने जिन अपेक्षाओं के साथ जनप्रतिनिधियों को चुना है, उन पर खरा उतरने के लिए सभी को शहरहित में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने पार्षदों से विकास संबंधी रचनात्मक सुझाव देने और वार्ड की जरूरतों को सामने रखने का आह्वान किया। डांगरा ने कहा कि सफाई व्यवस्था में सुधार के प्रयास शुरू किए गए हैं। प्रमुख स्थलों पर दिन और रात में दो बार सफाई करवाई जा रही है। रविवार को भी ठेकेदार के माध्यम से सफाई करवाई जा रही है।
पूर्व सभापति हरिवल्लभ कल्ला ने कहा कि जैसलमेर को बेहतर शहर बनाने के लिए सभी पार्षदों के सुझाव लेने चाहिए। वार्डों की समस्याओं और नागरिकों की जरूरतों को समझकर विकास की प्राथमिकताएं तय करने से नगरपरिषद के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। आयुक्त पवन कुमार ने नगरपरिषद की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने सडक़ों पर स्वच्छंद घूमने वाले गोवंश की धरपकड़ और मनमाने ढंग से ठेले लगाने की समस्या पर सख्ती बरतने की बात कही। इन व्यवस्थाओं में पार्षदों से सहयोग भी मांगा।
उपसभापति मधुबाला चौहान, पार्षद मुकेश नागौरी, अरुण पुरोहित, टीकमचंद जीनगर, दिव्या तेजवानी, सुशीला जेठा, जितेंद्र भूतड़ा और प्रदीपसिंह ने भी विचार रखे। चर्चा में सफाई व्यवस्था सुधारने, पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने और पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत सामने आई। पार्षदों ने शहर की पर्यटन छवि को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक स्थलों की व्यवस्थाओं और वार्ड स्तर की समस्याओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। कार्यशाला में सामाजिक कार्यकर्ता तरुण गोलकिया, जुगल किशोर शर्मा आदि मौजूद थे।
-जनसंवाद: नागरिकों की शिकायतें सुनकर समस्याओं की प्राथमिकता तय करना।
- जवाबदेही: संबंधित विभागों से समन्वय कर समाधान की प्रगति पर नजर रखना।
- शहरी व्यवस्था: सफाई, आवारा गोवंश और सडक़ों पर बेतरतीब ठेलों की समस्या पर कार्रवाई।
- विकास: वार्डों की जरूरतों और पार्षदों के सुझावों के आधार पर प्राथमिकताएं तय करना।
- पर्यटन: प्रमुख स्थलों की स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान देना।