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jaisalmer: दीपावली की चमक महंगी, स्वर्णनगरी में पुताई का खर्च 50 फीसदी तक बढ़ा

जैसलमेर में दीपावली और पर्यटन सीजन के चलते होटल, रिसॉर्ट और मकानों में रंगाई-पुताई की मांग अचानक काफी बढ़ गई है। कारीगरों की भारी कमी का फायदा उठाते हुए पेंटर्स ने दिहाड़ी के बजाय प्रति वर्ग फीट के हिसाब से काम करना शुरू कर दिया है, जिससे पुताई का बजट ₹20 हजार से बढ़कर ₹35 हजार तक पहुंच गया है। करीब 3500 पेंटर्स को लगातार काम मिलने के बावजूद मजदूरों की किल्लत बनी हुई है, जिससे त्योहार पर घर चमकाने की तैयारी आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 23 Oct 2026, 8:56 PM IST

jaisalmer news

जैसलमेर. घरों में रंगाई-पुताई का कार्य करती महिला मजदूर।

जैसलमेर. दीपावली पर घर चमकाने की तैयारी इस बार जेब पर भारी पड़ रही है। स्वर्णनगरी में रंगाई-पुताई के काम की मांग बढ़ी तो मजदूरों की उपलब्धता घट गई और वे अब बदले माहौल में दिहाड़ी की बजाय प्रतिफीट के हिसाब से मजदूरी लेने को तरजीह दे रहे हैं, जिसके दाम 4 रुपए प्रतिफीट पुट्टी और पुट्टी मय कलर का भाव 8 रुपए प्रति फीट तक हो गया है, जो महिलाएं और पुरुष पेंटर दिहाड़ी पर काम करते हैं, उनकी मजदूरी प्रतिदिन 1200 से 1500 रुपए तक पहुंच गई है। ऐसे में घर की पुताई का बजट 20 हजार रुपए से बढकऱ 35 हजार रुपए तक पहुंचने के उदाहरण सामने आ रहे हैं। यानी एक ही काम के लिए 15 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। त्योहार के साथ पर्यटन सीजन ने भी काम का दबाव बढ़ा दिया है। होटल, रिसॉर्ट, दुकानें और मकान—हर जगह पेंटर्स की मांग है। करीब 3500 पेंटर्स को काम मिला हुआ है, लेकिन कारीगरों की कमी के कारण वे ओवरटाइम करने में कोताही नहीं बरत रहे। बाजार में कारोबार की चमक बढ़ी है, लेकिन घर सजाने वालों के लिए यही चमक महंगी साबित हो रही है।

त्योहार से पहले खर्च की चोट

दीपावली से पहले घर की मरम्मत और रंगाई-पुताई करवाना आम तौर पर त्योहार की तैयारी का हिस्सा है, लेकिन इस बार खर्च बढऩे से परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। स्थानीय निवासी प्रेम कुमार के अनुसार, जिस काम पर 20 हजार रुपए खर्च होने का अनुमान था, उसके लिए अब 35 हजार रुपए तक देने पड़ रहे हैं। मजदूरी और पेंट दोनों की लागत बढऩे से खर्च का हिसाब बदल गया है। त्योहार पर घर को नया रूप देने की चाह बरकरार है, लेकिन इसके लिए जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है।

जरूरत से कम हैं मजदूर

श्रमिकों की कमी ने रंगाई-पुताई के काम को महंगा और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ठेकेदार रमजान छींपा के मुताबिक, 10 मजदूरों की जरूरत होने पर मुश्किल से 6 ही मिल पाते हैं। समय पर काम पूरा कराने के लिए अतिरिक्त मेहनताना देकर ओवरटाइम करवाना पड़ता है। पेंटर्स की दिहाड़ी भी पहले की तुलना में बढ़ गई है। पेंटर बबलू बताते हैं कि सुबह आठ बजे से देर रात तक काम करना पड़ रहा है। पेंटर नारायण के अनुसार, होटल और रिसॉर्ट से लगातार काम मिल रहा है और कई ग्राहकों को मना करना पड़ता है।शहर में रंग, डिस्टेंपर और ऑयल पेंट की दुकानों पर ग्राहकी बढ़ी है। व्यापारियों के अनुसार, इस बार बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में डेढ़ गुना तक पहुंच गई है। ऑयल पेंट की कीमत 1600 रुपए प्रति लीटर तक बताई जा रही है। हार्डवेयर, सेनेटरी और विद्युत सामग्री की मांग में भी तेजी है। दुकानदार गणेश के मुताबिक, पिछले 15 दिनों में हुई बिक्री सामान्य दिनों के तीन महीने के कारोबार के बराबर रही। अतिरिक्त मांग के कारण दुकानदारों को नया स्टॉक मंगवाना पड़ रहा है।

गांवों में मांडणे, शहर में पेंटिंग

दीपावली की तैयारी केवल शहर के पक्के मकानों और प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं कच्चे मकानों की दीवारों पर मिट्टी से रंगाई कर रही हैं और पारंपरिक मांडणे उकेर रही हैं। शहर में जहां पेंटर्स की मांग और मजदूरी बढ़ी है, वहीं गांवों में पारंपरिक तरीकों से घरों को नया रूप दिया जा रहा है। त्योहार की रौनक हर तरफ है, लेकिन शहर में बढ़ती लागत ने सजावट को महंगा बना दिया है।

आंकड़ों पर एक नजर

- 3500 पेंटर्स को मिल रहा काम

- 20 हजार से बढ़ कर 35 हजार तक हुआ खर्च

- 60 फीसदी मजदूर ही बाजार में उपलब्ध

- 1600 रुपए प्रति लीटर तक ऑयल पेंट

एक्सपर्ट व्यू - रोजगार की तेजी के साथ लागत का दबाव

त्योहारी और पर्यटन सीजन एक साथ सक्रिय होने से पेंटिंग, मरम्मत और निर्माण सामग्री के कारोबार में मांग बढ़ी है। श्रमिकों को अधिक काम मिल रहा है, लेकिन उपलब्ध श्रमशक्ति की कमी से मजदूरी और काम की लागत पर दबाव बढ़ा है। इसका सीधा असर घरों की मरम्मत और सजावट के बजट पर पड़ रहा है।

- गजेन्द्रसिंह, ठेकेदार