- गर्मी के मौसम में कहीं नहीं होने दी जाएगी पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न
पोकरण. राजस्थान सरकार के अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ एवं जन अभियोग निराकरण विभाग के मंत्री व पोकरण विधायक शाले मोहम्मद ने कहा कि विधानसभा में स्पष्ट हो चुका है कि किसी भी तरह की फोन टेपिंग नहीं हुई है। जिनके ऑडियो वायरल हुए थे, उन्हें वॉइस सैम्पल देने चाहिए। केन्द्र में मंत्री बने बैठे है, वे अपनी जिम्मेवारी तय नहीं कर पा रहे है। उन्होंने शुक्रवार को पोकरण प्रवास के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जांच एजेंसी को सहयोग करते हुए वॉइस सैम्पल देना चाहिए, तभी दूध का दूध पानी का पानी होगा। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने पोकरण के मिड-वे को बंद कर दिया। जिससे पर्यटन विकास को धक्का लगा था। साथ ही भाजपा सरकार इसे ठेकेदारों को दे रही थी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने ठेकेदारों के हाथों में जाने से मिड-वे को बचा लिया तथा सरकार की ओर से बजट घोषणा करते हुए पोकरण के आरटीडीसी गोडावण मिड-वे के लिए राशि स्वीकृत की गई है। शीघ्र ही इसकी मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा तथा इसे सुचारु रूप से संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जब केन्द्र में पर्यटन मंत्री थे, तब इसे शुरू किया गया था। ऐसे में कांग्रेस सरकार इसे बंद नहीं होने देगी तथा शीघ्र ही इसका संचालन शुरू किया जाएगा। जिससे पोकरण के पर्यटन विकास को भी पंख लगेंगे। उन्होंने गर्मी के मौसम में पोकरण में पेयजल व्यवस्था पर कहा कि 2013 तक पोकरण कस्बे में नहर के जलापूर्ति शुरू कर दी गई थी तथा स्वच्छ जलाशय का निर्माण चल रहा था। 2018 में पुन: विधायक बने, तब तक स्वच्छ जलाशय तैयार थे, लेकिन उनमें पानी नहीं भरा गया था। जिसके अधिकारियों को निर्देशित कर स्वच्छ जलाशयों को पानी से भरने और पोकरण कस्बे में गर्मी केे मौसम में भी पर्याप्त जलापूर्ति करने के लिए कहा गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पोकरण कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में कहीं पर भी पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने शुक्रवार को आयोजित हुई जनसुनवाई को लेकर कहा कि जिला व उपखंड के साथ अब ग्राम स्तर पर जनसुनवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि 10-10 ग्राम पंचायतों के कलस्टर बनाकर जनसुनवाई की जाएगी। जनसुनवाई के दौरान समस्याओं को लेकर अधिकारियों की जिम्मेवारी तय की जाएगी और उच्च स्तर से मोनीटरिंग की जाएगी। जिससे ग्रामीणों की प्रत्येक समस्या का समाधान हो सकेगा। ग्रामीणों को अपने गांव में ही समस्या के समाधान का मौका मिलेगा। जिससे उन्हें राहत मिलेगी।