स्वर्ण नगरी में इस समय गर्मी अपने चरम पर है। तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच चुका है और लू के थपेड़े आमजन का जीना मुहाल कर रहे हैं।
स्वर्ण नगरी में इस समय गर्मी अपने चरम पर है। तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच चुका है और लू के थपेड़े आमजन का जीना मुहाल कर रहे हैं। ऐसे में शहरवासियों के लिए बिजली की निर्बाध आपूर्ति संजीवनी बन सकती थी, लेकिन दुर्भाग्यवश विद्युत व्यवस्था खुद बीमार है। बीते कुछ दिनों से जिले भर में लगातार घंटों तक बिजली गुल रहने से लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। समस्या की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बिजली कब जाएगी और कब आएगी, इसका कोई तय समय नहीं है। कभी आधी रात को बिजली गुल हो जाती है, तो कभी दोपहर की चिलचिलाती गर्मी में। शहर के प्रमुख इलाकों में बिजली कटौती का सिलसिला आम बात हो गया है। कई बार तो उपभोक्ताओं को 6 से 8 घंटे तक बिजली का इंतजार करना पड़ता है।
घरों में लगे पंखे और कूलर बिजली के बिना महज सजावटी सामान बनकर रह गए हैं। लगातार बिजली न होने से इन्वर्टर भी जवाब दे चुके हैं। परिणामस्वरूप लोगों को रातें बिना नींद और दिन चैन के बिताने पड़ रहे हैं। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों से बच्चों के बेहोश होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
गुरुवार को आई बारिश के दौरान भी हालात और बिगड़ गए। घंटों बिजली गुल होने से आम जन का बुरा हाल देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों से बात करने पर वे तकनीकी खराबी, लोड शेडिंग और मौसम को जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
जनता की मांग है—बिजली आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ट्रांसफार्मर और फीडर की नियमित जांच की जाए और शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था हो।