मरुस्थली जिले में अक्षय तृतीया का पर्व बुधवार को श्रद्धा, उमंग और परम्पराओं की मिठास के साथ मनाया गया।
मरुस्थली जिले में अक्षय तृतीया का पर्व बुधवार को श्रद्धा, उमंग और परम्पराओं की मिठास के साथ मनाया गया। घर-घर में मूंग-चावल और पकवानों की खुशबू बसी रही, तो वहीं बड़े-बुजुर्गों ने पारम्परिक मान्यताओं के अनुसार आसमान, पशु, पक्षी और अन्य शगुनों को देखकर आने वाले मानसून में अच्छी बारिश और सुकाल का अनुमान लगाया।
नगर में अधिकांश दुकानें बंद रहीं। गलियों और मोहल्लों में पारम्परिक परिधानों में सजे बच्चे, युवक-युवतियां और महिलाएं उल्लास से भरे नजर आए। घरों में धान पर कलश स्थापना कर भरपूर धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना की गई। ग्रामीण अंचलों में भी रियाणों, पकवानों और पारम्परिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाया गया।
नगर आराध्य भगवान लक्ष्मीनाथ के दुर्ग स्थित मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसमें बड़ी संख्या में प्रवासी जैसलमेरी भी शामिल हुए, जो विशेष रूप से इस पर्व पर अपने नगर लौटते हैं। दर्शन के बाद लोगों ने अपने सगे-संबंधियों और मित्रों के घर जाकर बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया।
कई मोहल्लों में वर्षों पुरानी परम्परा के अनुसार एक-दूसरे के घर जाकर मूंग-चावल का स्नेह भोजन किया गया। पर्व ने न केवल भक्ति और परम्परा का भाव जगाया, बल्कि सामाजिक मेल-जोल और रिश्तों की गर्माहट को भी गहराया।