Jaisalmer Water Crisis: राजस्थान के पश्चिमी सरहदी जिलों में गर्मी का मौसम शुरू होते पेयजल संकट गहराने लगा है। वहीं आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने की सरकारी योजनाएं भी अटकने की आशंका है।
Jaisalmer Water Crisis: राजस्थान के पश्चिमी सरहदी जिलों में गर्मी का मौसम शुरू होते पेयजल संकट गहराने लगा है। वहीं आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने की सरकारी योजनाएं भी अटकने की आशंका है। जलदाय विभाग में सरकारी पेयजल टैंकरों की दरें ठेकेदारों ने पहले तो बेहद कम भरी और अब विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद ठेका फर्मों ने काम से हाथ खींच लिए हैं। ऐसे में गर्मी मं इस बार लोगों के सामने पेयजल संकट खड़ा होना तय है।
जैसलमेर के पोकरण में गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराने लगा है। शहरी क्षेत्र सहित आसपास की कॉलोनियों, गांवों और ढाणियों में टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था हर साल की तरह इस बार भी तय समय पर शुरू होनी थी, लेकिन टेंडर मेंदर बेहद कम दर भरने के बाद अब ठेकेदार पीछे हट गए हैं।
इससे शहर में पानी की आपूर्ति ठप पड़ गई है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जलदाय विभाग ने इस बार प्रतिस्पर्धा के चलते न्यूनतम दरों पर ठेके स्वीकृत किए। कुछ फर्मों ने ट्रैक्टर टंकी से पानी पहुंचाने के लिए 5 रुपए प्रति टंकी तक की दर भर दी।
विभाग ने नियमों के अनुसार सबसे कम दर को स्वीकार करते हुए कार्यादेश जारी कर दिया। तय कार्यक्रम के अनुसार 1 अप्रेल से टैंकर आपूर्ति शुरू होनी थी, लेकिन चार-पांच दिन बीतने के बाद भी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ।.स्थिति यह बनी कि ठेकेदारों ने निर्धारित दर पर पानी पहुंचाना व्यावहारिक रूप से असंभव बताया और काम शुरू करने से किनारा कर लिया। निर्धारित बिंदुओं से 5 से 15 किलोमीटर तक पानी ढोना इन दरों में संभव नहीं हो रहा है।
इधर गर्मी के कारण जल खपत तेजी से बढ़ रही है। जिन क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति नहीं है, वहां टैंकर ही एकमात्र सहारा होते हैं। अब टैंकर नहीं पहुंचने से कॉलोनियों और ढाणियों में जल संकट गहरा गया है। लोग दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।
अलग-अलग दूरी के अनुसार दरें तय की गई थीं, जिनमें ट्रैक्टर टंकी, लोडिंग टैक्सी और ट्रक टैंकर शामिल हैं। कागजों में व्यवस्था पूरी है, लेकिन जमीन पर आपूर्ति बंद है। अधिशासी अभियंता रामनिवास रैगर का कहना है कि ने पूरे मामले में उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है।
उक्त टेंडर अधीक्षण अभियंता स्तर पर स्वीकृत होने के कारण आगे की कार्रवाई वहीं से तय होगी। जब तक स्पष्ट निर्देश नहीं मिलते, तब तक समस्या का समाधान अटका हुआ है। कागजी प्रक्रिया के चलते राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं और इसका सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है। गर्मी के बीच पानी की कमी ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।