
जैसलमेर. मरुभूमि में हरियाली केवल रंग नहीं बदलती, बल्कि जीवन की दिशा भी बदल देती है। रेतीले विस्तार में रोपा गया प्रत्येक पौधा भविष्य की शीतल छांव, स्वच्छ हवा और सुरक्षित पर्यावरण का मौन वादा होता है। इसी विश्वास को जनभागीदारी का स्वरूप देते हुए राजस्थान पत्रिका के हरयाळो राजस्थान अभियान के तहत बुधवार को गजरूप सागर रोड स्थित संत नामदेव उद्यान में पौधरोपण का प्रेरक आयोजन हुआ। नामदेव छीपा समाज के अध्यक्ष भगवानदास खत्री की अध्यक्षता तथा पूर्व उप जिला प्रमुख डॉ. भूपेंद्र कुमार बारूपाल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में समाज के महिला-पुरुषों और पर्यावरण प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 200 पौधों का रोपण किया।
अभियान के अगले चरण में उद्यान परिसर में 500 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ सहजन (मोरिंगा), आंवला और अमरूद के पौधे रोपकर किया गया। स्थानीय जलवायु के अनुरूप इन पौधों का चयन केवल हरियाली बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पोषण, औषधीय महत्व और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर किया गया। पौधारोपण के दौरान पूरे परिसर में प्रकृति संरक्षण के प्रति उत्साह और अपनत्व का वातावरण दिखाई दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. भूपेंद्र कुमार बारूपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी और घटते वृक्ष आज मानव सभ्यता के सामने गंभीर चुनौती हैं। इन परिस्थितियों में पौधरोपण किसी औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना है। यदि समाज इस उत्तरदायित्व को साझा करे तो पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य सहज रूप से पूरा हो सकता है। अध्यक्ष भगवानदास खत्री ने कहा कि वृक्ष धरती की सबसे अमूल्य धरोहर हैं। वे केवल फल, फूल और छाया ही नहीं देते, बल्कि जीवन के आधार जल, वायु और मिट्टी के संतुलन की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रिका का हरयाळो राजस्थान अभियान समाज को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने वाली सार्थक पहल है।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ लेते हुए अधिकाधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार वर्ष में कुछ पौधे लगाकर उनका संरक्षण सुनिश्चित करे तो मरुभूमि का परिदृश्य भी हरियाली की नई पहचान बन सकता है। प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता ही आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। इस अवसर पर पुष्पा भाटी, तोरल भाटी, आनंद उर्फ इन्द्ररा, कैलाश कंवर, भंवर कंवर, माणक सौलंकी, घनश्याम सोलंकी, कोषाध्यक्ष प्रदीप भाटी, राजू शर्मा, प्रागाराम पंवार, नवल किशोर दर्जी, मूलचंद दर्जी, हस्तीमल माली, जितेंद्र पंवार, ललित बारूपाल, राजेश गर्ग, शिवलाल गर्ग, दीपक माली, दुष्यंत कुमार हड्डा तथा तोगाराम चौधरी सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमियों ने पौधारोपण में भागीदारी निभाई।