15 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Jaisalmer: थार की आर्द्रभूमि में ‘ पेंटेड स्टॉर्क’, जैव विविधता ने फिर जगाया भरोसा

किसी जलाशय में इसकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण मानी जाती है कि वहां पर्याप्त जल, प्राकृतिक खाद्य स्रोत और अपेक्षाकृत शांत वातावरण उपलब्ध है। खेतोलाई तालाब पर इसका दिखाई देना इस प्राकृतिक जलाशय की पारिस्थितिक समृद्धि को रेखांकित करता है।
2 min read
Google source verification
jaisalmer khetolai news

खेतोलाई तालाब बना प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना( फोटो- पत्रिका )

लाठी ( जैसलमेर). थार मरुस्थल के विस्तृत रेतीले परिदृश्य के बीच स्थित खेतोलाई गांव का मौसमी तालाब इन दिनों जैव विविधता की अनमोल तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। मंगलवार को तालाब पर आकर्षक प्रवासी जलपक्षी पेंटेड स्टॉर्क (रंगीन बगुला) का अवलोकन हुआ। इस दुर्लभ और मनमोहक पक्षी की मौजूदगी ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि थार की आर्द्रभूमियां केवल वर्षा जल का संग्रहण स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल प्राकृतिक आवास भी हैं। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार यह दृश्य क्षेत्र के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध जैव विविधता का सकारात्मक संकेत है। वन्यजीव प्रेमी पंकज विश्नोई ने बताया कि पेंटेड स्टॉर्क सामान्यतः उथले जलाशयों, तालाबों, झीलों और आर्द्रभूमियों में निवास करता है। यह मछलियां, मेंढक, घोंघे तथा अन्य जलीय जीवों को भोजन के रूप में ग्रहण करता है।

दुर्लभ जलपक्षी की दस्तक, स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का मजबूत संकेत

किसी जलाशय में इसकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण मानी जाती है कि वहां पर्याप्त जल, प्राकृतिक खाद्य स्रोत और अपेक्षाकृत शांत वातावरण उपलब्ध है। खेतोलाई तालाब पर इसका दिखाई देना इस प्राकृतिक जलाशय की पारिस्थितिक समृद्धि को रेखांकित करता है। उन्होंने बताया कि थार जैसे शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र में मौसमी तालाबों का महत्व केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं है। मानसून के बाद इन जलाशयों में जलभराव होने से जलीय जीवों की संख्या बढ़ती है, जिससे अनेक स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों को पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आश्रय मिलता है। यही कारण है कि हर वर्ष विभिन्न प्रजातियों के पक्षी इन आर्द्रभूमियों की ओर आकर्षित होते हैं और कुछ समय तक यहां प्रवास करते हैं। विश्नोई के अनुसार खेतोलाई तालाब पर पेंटेड स्टॉर्क का दर्ज किया गया यह अवलोकन मरुस्थलीय आर्द्रभूमियों के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

खेतोलाई तालाब बना प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना, बढ़ी संरक्षण की उम्मीद

यदि प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाए और उनके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखा जाए, तो भविष्य में भी अनेक दुर्लभ एवं आकर्षक पक्षियों का आगमन निरंतर बना रहेगा। इससे जैव विविधता संरक्षण के साथ पक्षी अवलोकन और प्रकृति पर्यटन की संभावनाओं को भी नया विस्तार मिल सकता है। उन्होंने कहा कि थार क्षेत्र की आर्द्रभूमियां भूजल पुनर्भरण, जलवायु संतुलन, जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इन जलाशयों को अतिक्रमण, प्रदूषण और अनियंत्रित मानवीय हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता से इन प्राकृतिक धरोहरों को लंबे समय तक संरक्षित रखा जा सकता है।

हकीकत यह भी

खेतोलाई तालाब पर पेंटेड स्टॉर्क की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि थार मरुस्थल केवल रेत के अनंत विस्तार का नाम नहीं, बल्कि संवेदनशील आर्द्रभूमियों और समृद्ध जैव विविधता का भी महत्वपूर्ण संसार है। जानकारों के अनुसार इन प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के पर्यावरणीय भविष्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।