स्वर्णनगरी जो अपनी विरासत, लोकसंस्कृति और पर्यटन के लिए देश-दुनिया में पहचानी जाती है, इन दिनों गंभीर दोहरी चुनौती से जूझ रही है।
स्वर्णनगरी जो अपनी विरासत, लोकसंस्कृति और पर्यटन के लिए देश-दुनिया में पहचानी जाती है, इन दिनों गंभीर दोहरी चुनौती से जूझ रही है। एक ओर पर्यटकों को मूल सुविधाओं की कमी, ठगी और महंगे दाम परेशान कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ऐतिहासिक सोनार दुर्ग में रात की सुरक्षा पर गहराता संकट स्थानीय लोगों और सैलानियों—दोनों की चिंता बढ़ा रहा है। लिविंग फोर्ट की गलियों और मोरियों में रात के समय बढ़ती हलचल ने सुकून छीन लिया है, वहीं अव्यवस्था और सांस्कृतिक मर्यादाओं के टूटते स्वरूप ने जैसलमेर की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है।
उधर, सोनार दुर्ग में देर रात अनजान लोगों की आवाजाही, संकरी गलियों में संदिग्ध हलचल और कई मार्गों का अंधेरे में डूब जाना दुर्गवासियों को असुरक्षित महसूस करा रहा है। मोरियों के पास रहने वाले परिवार सबसे अधिक भय में हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे हर आहट पर चौंक जाते हैं। हालिया रात की घटनाओं के बाद मामूली आवाज भी अनहोनी की आशंका पैदा कर देती है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ रहा है। नियमित और प्रभावी रात्रि गश्त की मांग के बावजूद अब तक ठोस व्यवस्था नहीं बन पाई है।
सुरक्षा के साथ-साथ जैसलमेर में पर्यटकों के साथ ठगी और धोखाधड़ी की शिकायतें भी बढ़ती जा रही हैं। ऊंट और जीप सफारी, गाइड सेवाओं, स्थानीय ट्रांसपोर्ट और खरीदारी के दौरान तय दरों से अधिक वसूली आम होती जा रही है। कई पर्यटकों का कहना है कि पहले कुछ और बताया जाता है, जबकि मौके पर पहुंचते ही दाम दोगुने कर दिए जाते हैं।नतीजा यह है कि कई पर्यटक जैसलमेर से खूबसूरत यादों के बजाय असंतोष लेकर लौट रहे हैं, जिसे बाद में वे सोशल मीडिया पर व्यक्त करते हैं।
एक और चिंताजनक पहलू यह है कि कुछ निजी डेजर्ट कैंप और आयोजनों में आयोजित तथाकथित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मर्यादा टूटती दिखाई दे रही है। लोकसंस्कृति के नाम पर परोसे जा रहे कार्यक्रमों में बढ़ती अश्लीलता और भोंडे प्रदर्शन न केवल पारंपरिक संस्कृति के विपरीत हैं, बल्कि परिवार और विदेशी पर्यटकों को भी असहज कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रवृत्ति जैसलमेर की सांस्कृतिक गरिमा को ठेस पहुंचा रही है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में सुरक्षा, ठगी और सांस्कृतिक गिरावट से जुड़ी खबरें तेजी से फैलती हैं।
इससे जैसलमेर की साख को गहरा नुकसान हो सकता है। लिविंग फोर्ट की पहचान, पर्यटकों का भरोसा और स्थानीय संस्कृति—तीनों खतरे में पड़ सकते हैं। उनके अनुसार जैसलमेर का पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था और पहचान की रीढ़ है। रात की सुरक्षा, ठगी पर सख्ती, पारदर्शी दरें और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर नियंत्रण अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुके हैं।