जैसलमेर की सुनहरी छवि पर गंदगी का ‘काला धब्बा’ गहराता जा रहा है। हर महीने करीब एक करोड़ खर्च और 250 कर्मचारियों के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल है। दिन में सड़कों पर कचरा और रात में ओवरफ्लो से आमजन परेशान हैं। हालात बिगड़ने से देश-विदेश में पर्यटन नगरी की छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जैसलमेर: विश्व पर्यटन मानचित्र पर सुनहरी पहचान रखने वाली स्वर्णनगरी चरमराई सफाई व्यवस्था की पीड़ा बयां कर रही है। हर महीने करीब एक करोड़ रुपए खर्च करने और लगभग 250 सफाई कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा चुकी है।
मुख्य मार्ग हो या भीतरी गलियां, हर तरफ जमा कचरे के ढेर, नालियों से बहता ओवरफ्लो पानी और मंडराते आवारा पशु आमजन की दिनचर्या को प्रभावित कर रहे हैं। दिन में गंदगी से परेशान स्थानीय बाशिंदों को रात के समय भी राहत नहीं मिलती।
कई इलाकों में रात होते ही ओवरफ्लो का पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे आवागमन बाधित होता है। करीब एक लाख की आबादी वाले जैसलमेर शहरी क्षेत्र में महज पांच किलोमीटर के दायरे में एक दर्जन से अधिक ऐसे मार्ग हैं, जहां दुर्गन्धयुक्त माहौल में चलना तक मुश्किल हो गया है।
जब हर महीने बड़ी धनराशि खर्च हो रही है, संसाधन और कर्मचारी मौजूद हैं, तो फिर स्वर्णनगरी की सफाई व्यवस्था कब सुधरेगी? और कब तक सुनहरी छवि पर यह सफाई संबंधी अव्यवस्था ग्रहण बनी रहेगी। शहर की सफाई व्यवस्था देखकर यहां आने वाले सैलानी भी हैरान हैं।
नालियों में प्लास्टिक फेंकने और जलापूर्ति के दौरान घरों से निकलने वाले पानी के कारण ओवरफ्लो की समस्या बढ़ती है। कचरा संग्रहण केंद्र खाली करने के बाद लोगों की ओर से खुले में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति व्यवस्था को कमजोर कर रही है।
-लजपाल सिंह सोढ़ा, आयुक्त, नगर परिषद जैसलमेर