जैसलमेर

jaisalmer: सोनार किले से नई कॉलोनियों तक जैसलमेर में विकास का पैमाना बदल रहा

जैसलमेर. शहर के विस्तार के साथ इस बार नगर परिषद चुनाव में विकास के मुद्दे भी बदल गए हैं। पुराने शहर में यातायात, पार्किंग, सफाई और विरासत संरक्षण की चुनौती है तो नई कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं की मांग बढ़ी है। हर वार्ड का अपना सवाल है और मतदाता अब घोषणाओं के बजाय स्थानीय जरूरतों पर जवाब मांग रहे हैं।
2 min read
Aug 29, 2026
jaisalmer
dron photo file

जैसलमेर. आबादी बढ़ रही है, नई कॉलोनियां बस रही हैं और शहर का फैलाव लगातार आगे बढ़ रहा है। इसके साथ विकास की तस्वीर भी बदल रही है। पुराने शहर के सामने जहां यातायात, पार्किंग, सफाई, सीवरेज और विरासत संरक्षण जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं, वहीं नई कॉलोनियों में पानी, सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग बढ़ रही है।

यही बदलाव इस बार नगर परिषद चुनाव में विकास के मुद्दे को नया रूप दे रहा है। अब हर वार्ड का अपना अलग सवाल है और मतदाता भी सामान्य घोषणाओं के बजाय अपने इलाके की जरूरतों पर जवाब मांग रहा है। सोनार किले से जुड़े पुराने शहर के इलाकों में आबादी के साथ वाहनों और पर्यटकों का दबाव बढ़ गया है। संकरी गलियों में यातायात व्यवस्था, पार्किंग, नियमित सफाई और सीवरेज जैसी समस्याएं ज्यादा दिखाई दे रही हैं। यहां विकास का मतलब केवल नई सड़क बनाना नहीं रह गया है, बल्कि उपलब्ध जगह में बेहतर व्यवस्था तैयार करना हो गया है।

नई कॉलोनियों में शहर बस गया, सुविधाएं पीछे रह गईं

शहर के बाहरी हिस्सों में कई नई बस्तियां आकार ले चुकी हैं। घर बन गए, परिवार रहने लगे और आबादी बढ़ गई, लेकिन कई जगह सड़क, नाली, पानी, स्ट्रीट लाइट और नियमित सफाई जैसी सुविधाएं उसी गति से नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में नई कॉलोनियों के मतदाताओं के लिए विकास का पहला मतलब अब बुनियादी सुविधाएं बन गया है।

वार्ड बदलते ही बदल रही विकास की प्राथमिकता

- पुराने शहर में पार्किंग और यातायात बड़ी चुनौती बन रहे हैं।

- नई कॉलोनियों में सड़क और पेयजल सबसे प्रमुख जरूरत बन गई है।

- कई इलाकों में नाली और जल निकासी अब भी समस्या बनी हुई है।

- स्ट्रीट लाइट और सफाई सीधे रोजमर्रा की जरूरत बन गई है।

- तेजी से बढ़ती आबादी से भविष्य की सुविधाओं का दबाव बढ़ रहा है।

- मतदाता अब वार्डवार काम और समयसीमा को लेकर सवाल पूछ सकता है।

चुनाव में पहली बार ‘पूरे शहर’ से ज्यादा ‘अपने वार्ड’ की बात

नगर परिषद के 45 वार्डों में चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में प्रत्याशियों के लिए पूरे शहर के विकास का बड़ा दावा करने से ज्यादा जरूरी अपने वार्ड की छोटी लेकिन रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान बताना हो गया है। एक वार्ड में सड़क सबसे बड़ा मुद्दा हो सकती है तो दूसरे में पानी। कहीं सफाई व्यवस्था मतदाताओं को परेशान कर रही है तो कहीं स्ट्रीट लाइट और जल निकासी। यही स्थानीय अंतर चुनावी मुद्दों को भी अलग-अलग बना रहा है।

एक्सपर्ट व्यू- बुनियादी सुविधाओं का नेटवर्क व उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जरूरी

जैसलमेर का विस्तार अब विकास की पारंपरिक योजना से आगे निकल रहा है। पुराने और नए शहर के लिए एक जैसी विकास नीति प्रभावी नहीं रहेगी। नई कॉलोनियों में पहले बुनियादी सुविधाओं का नेटवर्क तैयार करना होगा, जबकि पुराने शहर में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जरूरी है। वार्डवार जरूरतों का आकलन कर बजट और समयसीमा तय करने से विकास ज्यादा दिखाई देगा।

- डॉ. अरविंद माथुर, राजनीतिक विश्लेषक

Updated on:
29 Aug 2026 09:01 pm
Published on:
29 Aug 2026 09:01 pm