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jaisalmer: प्रचार से आगे बढ़ा चुनाव, अब तैयार होगा प्रत्याशियों के काम का रिपोर्ट कार्ड

नगरीय निकाय चुनाव में इस बार प्रत्याशियों के चेहरों और वादों के साथ काम का रिपोर्ट कार्ड भी चुनावी मुद्दा बन सकता है। वार्ड की सड़क, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और सीवरेज जैसी सुविधाओं पर मतदाता पुराने काम का हिसाब मांगेंगे। ऐसे में चुनावी प्रचार का नया फॉर्मूला उभर रहा है—चेहरा, दावा और धरातल पर काम का हिसाब।
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जैसलमेर. नगरीय निकाय चुनाव में इस बार प्रचार सिर्फ पोस्टर, जनसंपर्क और वादों तक सीमित नहीं रहेगा। चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए काम का रिपोर्ट कार्ड सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। पुराने पार्षदों के कार्यकाल में वार्ड में हुए विकास कार्यों की समीक्षा होगी तो नए प्रत्याशियों से भी मतदाता यह जानना चाहेंगे कि जीतने के बाद वे वार्ड की तस्वीर कैसे बदलेंगे। इस चुनाव में वार्ड स्तर पर सडक़, नाली, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पार्क, पेयजल, सीवरेज और अन्य नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाने की कवायद चुनावी चर्चा को नया आयाम दे सकती है। इससे प्रचार के दौरान किए जाने वाले दावों और धरातल पर हुए काम के बीच अंतर भी स्पष्ट होगा। यानी इस बार चुनावी प्रचार का नया फॉर्मूला सामने आ सकता है—चेहरा, दावा और भाषण के साथ काम का हिसाब। मतदाता के हाथ में यदि वार्ड का वास्तविक रिपोर्ट कार्ड पहुंचता है तो चुनावी बहस भी ज्यादा तथ्यात्मक और जवाबदेह बन सकती है।

रिपोर्ट कार्ड में क्या दिखेगा?

-पांच साल में स्वीकृत और पूरे हुए विकास कार्य

-निर्माण कार्यों पर खर्च हुई राशि

-सडक़ निर्माण और मरम्मत की स्थिति

-नालियों की सफाई एवं निर्माण की स्थिति

-कितनी स्ट्रीट लाइट लगीं और कितनी खराब

-पार्कों के विकास और रख-रखाव की वास्तविक स्थिति

-सफाई व्यवस्था और नियमितता

-लंबित शिकायतों और अधूरे कार्यों की संख्या

-वार्ड में भविष्य की प्रमुख जरूरतें

मतदाता ऐसे परखेंगे प्रत्याशी

-पुराने पार्षद: कितने काम स्वीकृत हुए, कितने पूरे और कितने अधूरे रहे।

नए प्रत्याशी: पुराने कामों की कमियां बताने के साथ समाधान का रोडमैप।

बजट: वार्ड को कितना पैसा मिला और उसका कितना उपयोग हुआ।

ग्राउंड रिपोर्ट: सरकारी रिकॉर्ड के साथ मौके की वास्तविक तस्वीर।

जनता की राय: वार्डवासियों से पूछा जाएगा कि सबसे बड़ा बदलाव क्या हुआ।

वादे बनाम काम: पिछले वादों में कितने पूरे हुए, इसका हिसाब सामने आएगा।

एक्सपर्ट व्यू : अब बदल रहा चुनावी विमर्श

स्थानीय निकाय चुनाव में मतदाता सीधे तौर पर अपने वार्ड के विकास से जुड़ा परिणाम देखता है। ऐसे में यदि प्रत्याशियों के दावों को काम, खर्च और जमीनी स्थिति के आधार पर परखा जाए तो चुनावी विमर्श व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से हटकर स्थानीय मुद्दों पर आ सकता है। रिपोर्ट कार्ड मतदाता को यह समझने में मदद करेगा कि किस प्रत्याशी ने क्या कहा और वास्तव में कितना किया।

-अरुण माथुर, राजनीतिक विश्लेषक