जैसलमेर

दीपावली खरीदारी में जैसलमेर का बाजार नकदी से निकलकर मोबाइल तक पहुंचा

दीपावली की खरीदारी में जैसलमेर के बाजार का लेनदेन नकदी से निकलकर मोबाइल तक पहुंच गया है। मिठाई, कपड़े और घरेलू सामान की दुकानों पर क्यूआर कोड से भुगतान का चलन बढ़ा। यूपीआइ ने ग्राहकों की खरीदारी आसान बनाने के साथ छोटे कारोबारियों के व्यापार का तरीका भी बदला है।
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Updated: 7 Nov 2026, 8:08 PM IST
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जैसलमेर. दीपावली की खरीदारी में इस बार बाजार की रौनक के साथ लेनदेन का तरीका भी बदलता नजर आया। मिठाई की दुकान हो या कपड़ों का शोरूम, सजावटी सामान की दुकान हो या घरेलू उपयोग की वस्तुओं का बाजार, खरीदारी के बाद भुगतान के लिए अब जेब से बटुआ निकालने के बजाय मोबाइल फोन आगे बढ़ाना आम होता जा रहा है। दुकानों के काउंटर पर लगे क्यूआर कोड ने नकदी आधारित खरीदारी की पुरानी व्यवस्था के बीच डिजिटल भुगतान को नई जगह दी है। सरहदी जिले जैसलमेर में यूपीआइ का बढ़ता इस्तेमाल केवल ग्राहकों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने छोटे कारोबारियों के दैनिक व्यापार और भुगतान प्रबंधन का तरीका भी बदला है। दीपावली जैसे बड़े खरीदारी पर्व पर बाजार में एक ही ग्राहक कई दुकानों से सामान खरीदता है। पहले हर खरीदारी के बाद नकदी निकालना, खुले पैसे तलाशना और छुट्टे लौटाना लेनदेन का हिस्सा था। अब मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने की सुविधा ने इस प्रक्रिया को सरल बनाया है। मिठाई के डिब्बे, कपड़ों की खरीदारी और घर की सजावट के सामान का भुगतान भी मोबाइल से किया जा रहा है। इससे ग्राहकों को नकदी साथ रखने की अनिवार्यता कम महसूस होने लगी है।

छोटे कारोबारियों के लिए नई व्यवस्था

डिजिटल भुगतान का असर बड़े प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहा। छोटी दुकानों और स्थानीय कारोबारियों के काउंटर पर भी क्यूआर कोड दिखाई देने लगे हैं। कारोबारियों के लिए इसका सबसे बड़ा लाभ भुगतान की सुविधा और लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड है। नकदी गिनने, छुट्टे की व्यवस्था करने और बार-बार हिसाब मिलाने की जरूरत कुछ हद तक कम हुई है। ग्राहकों को भी खरीदारी के तुरंत बाद भुगतान की पुष्टि मिल जाती है। इस बदलाव ने छोटे व्यापार को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भूमिका निभाई है।

सुविधा के साथ बदली उपभोक्ता आदत

यूपीआइ भुगतान ने खरीदारी के दौरान उपभोक्ताओं की व्यवहारगत आदतों को भी प्रभावित किया है। मोबाइल में उपलब्ध बैंकिंग सुविधा के कारण भुगतान के लिए नकदी की उपलब्धता पर निर्भरता घटती है। हालांकि, डिजिटल भुगतान की सुविधा के साथ तकनीकी निर्भरता भी बढ़ी है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, मोबाइल की बैटरी और बैंकिंग सेवा उपलब्ध होना जरूरी है। इसके अलावा गलत क्यूआर कोड, फर्जी भुगतान संदेश और साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता भी जरूरी है।

बाजार की बदलती अर्थव्यवस्था का संकेत

दीपावली की खरीदारी में डिजिटल भुगतान की बढ़ती मौजूदगी स्थानीय बाजार के बदलते स्वरूप का संकेत है। जैसलमेर जैसे पर्यटन आधारित जिले में भी कारोबारियों के लिए भुगतान के आधुनिक विकल्प अपनाना प्रतिस्पर्धा और ग्राहक सुविधा से जुड़ गया है। नकदी का महत्व पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन मोबाइल आधारित भुगतान ने खरीदारी के अनुभव में अपनी जगह मजबूत की है।

बाजार में डिजिटल बदलाव के पांच प्रमुख पहलू

भुगतान का नया माध्यम: नकदी के साथ यूपीआइ खरीदारी का सहज विकल्प बना।

छोटे व्यापार को सहारा: स्थानीय दुकानदार भी डिजिटल लेनदेन व्यवस्था अपना रहे हैं।

समय की बचत: भुगतान और उसकी पुष्टि की प्रक्रिया पहले से आसान हुई।

हिसाब में पारदर्शिता: डिजिटल ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड कारोबारियों के लिए उपयोगी है।

साइबर सुरक्षा की चुनौती: भुगतान से पहले सही नाम और खाते की पुष्टि जरूरी है।

एक्सपर्ट व्यू : डिजिटल भुगतान ने बदला व्यापार का व्यवहार

डिजिटल भुगतान अब केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि आधुनिक व्यापारिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। त्योहारों पर खरीदारी का दबाव अधिक रहता है। ऐसे में यूपीआइ से भुगतान करने पर ग्राहकों को नकदी रखने और छुट्टे की समस्या से राहत मिलती है। छोटे दुकानदारों को भी प्रत्येक डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड मिलता है, जिससे दैनिक हिसाब व्यवस्थित रखने में मदद मिलती है। हालांकि, कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को भुगतान की पुष्टि किए बिना सामान नहीं सौंपना चाहिए। अनजान लिंक, फर्जी स्क्रीनशॉट और संदिग्ध भुगतान अनुरोधों से बचना भी उतना ही जरूरी है।

- महेश पुरोहित, डिजिटल भुगतान विशेषज्ञ

Updated on:
7 Nov 2026, 8:08 PM IST
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