
पोकरण: भिणाजपुरा सोलर प्लांट में लगी सोलर प्लेटें।
जैसलमेर. दीपावली पर घरों और बाजारों को रोशन करने वाली बिजली के पीछे अब थार की धूप और हवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। जिस मरुस्थलीय भूभाग की पहचान कभी तेज गर्मी, रेत के धोरों और सीमित संसाधनों से रही, वही अब देश के स्वच्छ ऊर्जा मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। जैसलमेर और बाड़मेर में सौर-पवन परियोजनाओं का विस्तार बिजली उत्पादन से आगे निवेश, उद्योग, तकनीकी सेवाओं और रोजगार की नई संभावनाएं खोल रहा है। करीब तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव ने जैसलमेर को हरित ऊर्जा के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ाई हैं। अब इस बदलाव की असली कसौटी यह होगी कि ऊर्जा उत्पादन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना लाभ मिलता है।
जैसलमेर में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिए करीब तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें लगभग 60 हजार मेगावाट क्षमता की सौर, पवन, बैटरी भंडारण और जैवभार आधारित परियोजनाएं शामिल हैं। इनके लिए करीब 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि चिन्हित किए जाने की जानकारी है। यह निवेश धरातल पर उतरता है तो निर्माण, परिवहन, विद्युत उपकरण, तकनीकी सेवाओं और रखरखाव से जुड़ी गतिविधियों को विस्तार मिल सकता है।
पोकरण क्षेत्र के रामपुरिया, भिणाजपुरा, हस्तिनापुर और मसूरिया में रिन्यू की सौर परियोजना करीब 3500 एकड़ में फैली है। इसकी क्षमता के उपलब्ध विवरणों में 975 मेगावाट और 1.3 गीगावॉट के अलग-अलग आंकड़े हैं। सालाना करीब 2490 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। वहीं फतेहगढ़, लाठी, नेड़ान-मूलाना और नोख क्षेत्र में सौर परियोजनाओं का विस्तार जैसलमेर को ऊर्जा उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा है।
राजस्थान की करीब 4913 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता में जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र की हिस्सेदारी 4000 मेगावाट से अधिक बताई जाती है। बाड़मेर में एक हजार से अधिक कृषि कुओं पर सौर संयंत्र संचालित होने और बालोतरा के पॉपलीन उद्योग में सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से बदलाव का दायरा स्पष्ट होता है।
-सौर मॉड्यूल स्थापना, विद्युत कार्य और तकनीकी निगरानी में रोजगार के अवसर।
- मशीनरी संचालन, परिवहन, सुरक्षा और रखरखाव से स्थानीय सेवाओं की मांग।
-युवाओं के कौशल प्रशिक्षण से तकनीकी नौकरियों में स्थानीय भागीदारी बढ़ने की संभावना।
-बैटरी भंडारण और पारेषण नेटवर्क से ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश अवसर।
परियोजनाओं के विस्तार के साथ पारेषण लाइन, ग्रिड संतुलन और बैटरी भंडारण की क्षमता बढ़ाना जरूरी होगा। सीमित जल संसाधन, भूमि उपयोग, पर्यावरणीय संतुलन और प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं।
पश्चिमी राजस्थान की वास्तविक ताकत केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पारेषण, ऊर्जा भंडारण, कौशल विकास और सहायक उद्योगों का समानांतर विस्तार जरूरी है। स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और स्थानीय उद्यमियों को परियोजनाओं की आपूर्ति शृंखला से जोड़ने पर निवेश का व्यापक आर्थिक लाभ क्षेत्र को मिल सकेगा।
— अरविन्द गोपा, अधिवक्ता व ऊर्जा विशेषज्ञ
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Updated on:
7 Nov 2026, 8:18 PM IST
Published on:
7 Nov 2026, 8:18 PM IST
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