जैसलमेर

‘जौहर, शाके और बलिदान करने वाले हमारे ही पूर्वज’

-देगराय माता के मंदिर में क्षत्रिय युवक संघ के आवासीय माध्यमिक प्रशिक्षण शिविर का संचालन
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Dec 31, 2018
jaisalmer
'जौहर, शाके और बलिदान करने वाले हमारे ही पूर्वज'

डाबला. क्षेत्र की रासला ग्राम पंचायत मुख्यालय के पास स्थित देगराय माता के मंदिर परिसर में स्थित जूनी जाल प्रांगण में चल रहे क्षत्रिय युवक संघ के सात दिवसीय आवासीय माध्यमिक प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संघ के चंदनसिंह मूलाना ने बताया कि क्षत्रिय युवक संघ के माध्यमिक प्रशिक्षण शिविर के छठे दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व मंगलाचरण के साथ सामूहिक ध्वज वंदना का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में देवीसिंह माडपुरा ने 'भारत का मान बिंदु केशरिया यह झंडा हमारा ...' से शुरूआत की। इस दौरान पदमसिंह रामगढ़ के निर्देशन में पथक शिक्षकों ने संघ परम्परा के अनुसार कई तरह के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक व मानसिक विकास के लिए कठिन संघर्षों वाले विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया। शिविर के दौरान संचालक देवीसिंह माडपुरा ने बौद्धिक सत्र में शिविरार्थियों से चर्चा करते हुए कहा कि सभी के साथ विनय भाव से प्रेम पूर्वक आपस में मिलजुल कर रहने की बात कही। शिविर में संघ के संस्थापक तनसिंह की ओर से लिखित समाज चरित्र पुस्तक के जीवित समाज के लक्षण शीर्षक का पठन करते हुए तनसिंह के बतायें मार्ग पर चलने को कहा। उन्होनें कहा कि हमें महापुरुषों के जीवन का अनुसरण करना चाहिए। जौहर, शाके और बलिदान करने वाले हमारे ही पूर्वज थे। जो इसी महान कौम में पैदा हुए। हमें हमारी थाती को संजोकर रखना है। उस पर गर्व करते हुए संस्कारों को सीखने का प्रयास करना है। कार्यक्रम दौरान नरपतसिंह राजगढ़ के निर्देशन में रात्रि में अंताक्षरी, प्रेरक प्रसंग आदि विषयों पर चर्चाएँ हुई। शिविरार्थियों ने अपने अपने घट के अनुसार ऐतिहासिक लघु नाटिकाएं प्रस्तुत की गई। जिसमें वीर दुर्गादास, वीर नरपाल देवल पडि़हार, वीर वीरमदेव आदि वीरों के जीवन चरित्र को लेकर उपस्थित समस्त शिविरार्थियों के समक्ष चित्रण प्रस्तुत किया गया। रतानसिंह बडोड़ागांव के संचालन में तनसिंह द्वारा रचित सहगीत 'बिछुड़े हुए बुलाकर मेले लगा रहे है ...' गायन कर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि तनसिंह के जो भाव थे, उन्हें हम थोड़ा समझने का प्रयास करें। उन्होंने कहा क्षत्रिय जाति नहीं, वृत्ति है। क्षत्रिय वह है, जो स्वयं मरकर औरों को जीने का मौका देता है। इस अवसर पर शंका समाधान नाम शीर्षक से कार्यक्रम रखा गया। जिसमें कई शिविरार्थियों ने अपनी अपनी शंकाएं रखी। जिसका आपसी चर्चा के माध्यम से समाधान भी हुआ। इस दौरान हवन भी किया गया।

Published on:
31 Dec 2018 05:58 pm