स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बावजूद नाचना क्षेत्र के भारेवाला और चिन्नू गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति दयनीय बनी हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बावजूद नाचना क्षेत्र के भारेवाला और चिन्नू गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। भारेवाला पीएचसी पर डॉक्टर की नियुक्ति नहीं है, जिससे मरीजों का उपचार एएनएम और कंपाउंडर के भरोसे चल रहा है। वहीं, चिन्नू पीएचसी में भी स्थायी डॉक्टर नहीं होने के कारण कार्य व्यवस्था के तहत अस्थायी डॉक्टर नियुक्त किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
चिकित्सकों की कमी के चलते ग्रामीणों को मजबूरन 50 किलोमीटर दूर नाचना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है। कई मरीज अधिक खर्च कर निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।
एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक डॉक्टर, एक कंपाउंडर, एक नर्स, एक एएनएम, एक वार्ड बॉय और अन्य स्टाफ मिलाकर सात सदस्यों की आवश्यकता होती है, लेकिन भारेवाला पीएचसी में डॉक्टर न होने से पूरा भार एएनएम और कंपाउंडर पर पड़ रहा है।
नाचना क्षेत्र नहरी क्षेत्र होने के कारण फसल कटाई के समय सर्पदंश की घटनाएं आम हैं। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य है। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग की है, ताकि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
भारेवाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से डॉक्टर नहीं होने के कारण आए दिन मरीज परेशान होते हैं। उपचार के लिए 50 किमी दूर नाचना अस्पताल आना पड़ता है।
-करणवीर सियाग, ग्रामीण भारेवाला
भारेवाला और चिन्नू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर के पद रिक्त चल रहे हैं। जल्द ही यहां डॉक्टर लगाने के प्रयास किए जाएंगे।
-राजेंद्र पालीवाल, सीएमएचओ, जैसलमेर