सुनहरी रेत, ऐतिहासिक दुर्ग और संस्कृति के रंगों से सराबोर जैसलमेर इस समय अजीब सी खामोशी से गुजर रहा है।
सुनहरी रेत, ऐतिहासिक दुर्ग और संस्कृति के रंगों से सराबोर जैसलमेर इस समय अजीब सी खामोशी से गुजर रहा है। आमतौर पर अगस्त से फरवरी माह के दिनों में यहां पर्यटन का सीजन माना जाता है। अप्रेल की तन झुलसाने वाली गर्मी में पर्यटन सीजन ऑफ़ का असर देखा जा सकता है। इन दिनों में पर्यटन स्थलों पर पसरा सन्नाटा, बाज़ारों में घटती चहल-पहल और होटल-गेस्टहाउस में खाली पड़े कमरे बता रहे हैं कि जैसलमेर का जीवन कितना हद तक पर्यटन पर निर्भर हो गया है।
गड़ीसर सरोवर, सोनार दुर्ग, सम के धोरे और पटवों की हवेली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल बीते दिनों से पर्यटकों की कमी झेल रहे हैं। विदेशी पर्यटक बहुत ही कम कम आ रहे हैं और घरेलू पर्यटक भी स्कूलों की पढ़ाई और गर्मी की भीषणता के चलते नहीं पहुंच रहे। स्थानीय गाइड राजेन्द्र बताते हैं हर साल अप्रेल माह के अंत तक थोड़ा-बहुत काम मिल जाता था, लेकिन इस बार स्थिति अलग है।
जैसलमेर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हस्तशिल्प, कपड़ों, सजावटी वस्तुओं और टूरिज्म से जुड़ी सेवाओं से आता है। दुकानदार रणजीत कहते हैं कि सुबह दुकान खोलते हैं, लेकिन शाम तक एक भी ग्राहक नहीं आता। बिजली-पानी का बिल, दुकान का किराया और परिवार का खर्चा मुश्किल हो गया है।
होटल संचालन से जुड़े अमित कुमार कहते हैं कि समूचे जैसलमेर में 70 प्रतिशत से अधिक होटल खाली हैं। स्टाफ की छुट्टी करनी पड़ रही है, कई होटल अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं।इस स्थिति में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों, टैक्सी चालकों, ऊंट व जीप संचालकों को भी काम नहीं मिल रहा।
पर्यटन आधारित छोटे व्यापारियों, गाइड्स, कलाकारों और रेस्त्रां कर्मियों की आमदनी थम सी गई है। कई परिवार शहर छोडकऱ अपने गांवों की ओर लौट गए हैं। स्थानीय निवासी लक्ष्मणराम बताते हैं कि पहले एक सीजन में कमाकर सालभर का खर्च निकल जाता था, अब खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है। पर्यटन ब्यवसाय से जुड़े गिरिराज डावाणी के अनुसार जैसलमेर को बारहमासी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए ताकि इस तरह की निर्भरता कम हो सके। पर्यटन विशेषज्ञ पुष्पेंद्र व्यास बताते हैं कि.जैसलमेर के लिए पर्यटन केवल कारोबार नहीं, जीवन रेखा है।जब सैलानी नहीं आते, तो पूरा शहर जैसे थम जाता है। पर्यटन को विविध रूपों में बढ़ावा देने की योजनाएं बनाई जाने की दरकार है।