जैसलमेर

पूर्व महारावल ब्रजराज सिंह को दी अंतिम विदाई, निकाली वैकुण्ठी

जैसलमेर रियासत के पूर्व महारावल ब्रजराज सिंह का अंतिम संस्कार मंगलवार को बड़ाबाग स्थित पूर्व राजपरिवार के श्मशान स्थल में किया गया।

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Dec 29, 2020

जैसलमेर। जैसलमेर रियासत के पूर्व महारावल ब्रजराज सिंह का अंतिम संस्कार मंगलवार को बड़ाबाग स्थित पूर्व राजपरिवार के श्मशान स्थल में किया गया। पूर्व महारावल की पार्थिव देह सड़क मार्ग से मंगलवार सुबह जैसलमेर पहुंची। दोपहर में उनके अंतिम दर्शन करने जन सैलाब उमड़ पड़ा। जैसलमेर शहर के सोनार दुर्ग सहित मुख्य बाजार बंद रहे।

ब्रजराज सिंह का सोमवार को निधन हो गया था। वह 52 वर्ष के थे। गत कुछ दिनों से वह बीमार चल रहे थे और हरियाणा के गुरुग्राम में मेदांता अस्पताल में भर्ती थे जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना आते ही जैसलमेर में शोक की लहर छा गई। साथ ही सोनार दुर्ग का ध्वज झुका दिया गया तथा किले स्थित पैलेस को सैलानियों के लिए बंद कर दिया गया। कुछ दिन पूर्व पेट में तकलीफ होने पर उन्हें जोधपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें मेदांता अस्पताल भेज दिया गया।

पूर्व महारावल के निधन की सूचना मिलने के बाद जैसलमेर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में हर कोई स्तब्ध रह गया। लोगों ने केवल 52 वर्ष की आयु में ही सिंह के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। सोशल मीडिया पर भी हजारों लोगों ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके बचपन से लेकर अब तक की तस्वीरों से सोशल मीडिया पट गया। ब्रजराज सिंह का जन्म 13 नवंबर 1968 को जैसलमेर में हुआ। उनकी शादी 28 जनवरी 1993 को नेपाल के महाराजा सहदेव शमशेर जंग बहादुर की पुत्री राजेश्वरी देवी के साथ हुई थी। उनके परिवार में राजेश्वरी देवी और दो पुत्र कुंवर चेतन्यराज सिंह भाटी और जनमेज्य राज सिंह भाटी है।

जानकारी के अनुसार ब्रजराज सिंह के पिता पूर्व महारावल रघुनाथ सिंह का निधन भी 52 साल की आयु में हुआ। उनके निधन के बाद रियासतकालीन परंपरा के अनुसार ब्रजराज सिंह का राज्याभिषेक मार्च 1993 में किया गया। पूर्व महारावल ब्रजराज सिंह जैसलमेर की कला संस्कृति के संरक्षक थे और मान्यताओं की पालना पूरे विधि विधान के साथ करते थे। उन्होंने जैसलमेर के प्राचीन राजमहलों का पुरातन शिल्पकला के अनुसार जीर्णोधार करवाया और वहां संग्रहालय स्थापित कर देसी विदेशी सैलानियों जैसलमेर की सैकड़ों वर्ष प्राचीन सभ्यताएं संस्कृति व इतिहास के द्वार खोल दिए।

Updated on:
29 Dec 2020 05:28 pm
Published on:
29 Dec 2020 05:24 pm
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