
मोहनगढ़. सीमावर्ती एवं नहरी क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा केंद्र मोहनगढ़ का राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों केवल दो चिकित्सकों के भरोसे संचालित हो रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन 250 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के कई पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। सीमित संसाधनों के बीच दोनों चिकित्सक लगातार मरीजों का उपचार कर रहे हैं।
मोहनगढ़ सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोग उपचार के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल में सुबह से ही भीड़ लग जाती है। डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को अपनी बारी का लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि उपलब्ध चिकित्सकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ गई हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. मनोहरसिंह के अनुसार उपलब्ध संसाधनों के बावजूद मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी वे कई घंटों तक अस्पताल में रुककर मरीजों की जांच और उपचार करते हैं, ताकि किसी भी मरीज को बिना इलाज वापस नहीं लौटना पड़े। बढ़ते कार्यभार के बावजूद वे लगातार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
अस्पताल में चिकित्सकों सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण गंभीर मरीजों को आगे के उपचार के लिए जिला मुख्यालय अथवा अन्य शहरों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। इससे मरीजों का समय और आर्थिक व्यय दोनों बढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मोहनगढ़ सीमावर्ती और विस्तृत नहरी क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है, इसलिए यहां पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र रिक्त पद नहीं भरे गए तो बढ़ती आबादी और मरीजों के दबाव के बीच स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावित होंगी। ग्रामीणों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में रिक्त चिकित्सकों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के पदों पर जल्द नियुक्तियां करने की मांग की है, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को समय पर बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।