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Jaisalmer: मानसून अलर्ट मोड: बाढ़ जोखिम घटाने संसाधन अपडेट रखने में जुटा प्रशासन

जैसलमेर. मानसून की सक्रियता से पहले जैसलमेर में आपदा प्रबंधन का फोकस अब राहत कार्यों से अधिक पूर्व तैयारी पर है। जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल ने सभी विभागों को संसाधन अपडेट रखने, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत करने और संभावित बाढ़ व जल-भराव वाले क्षेत्रों में अग्रिम तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य साफ है—आपदा आने से पहले राहत तंत्र पूरी तरह सक्रिय रहे।
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जैसलमेर. बैठक में आपदा प्रबंधन की चर्चा करते हुए। पत्रिका

जैसलमेर. मानसून की सक्रियता से पहले जैसलमेर में आपदा प्रबंधन का फोकस अब राहत कार्यों से अधिक पूर्व तैयारी पर है। जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल ने सभी विभागों को संसाधन अपडेट रखने, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत करने और संभावित बाढ़ व जल-भराव वाले क्षेत्रों में अग्रिम तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। लक्ष्य साफ है—आपदा आने से पहले राहत तंत्र पूरी तरह सक्रिय रहे।

फोकस इन बिंदुओं पर

-संभावित जलभराव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सतत निगरानी।

-नाव, गोताखोर, वायरलेस सेट, लाइफ जैकेट, रस्सियां, टॉर्च और अन्य रेस्क्यू उपकरण तैयार।

-पेयजल संकट से बचाव के लिए टैंकर, जनरेटर और वैकल्पिक जलापूर्ति व्यवस्था सक्रिय।

-मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए पर्याप्त दवाइयां और मोबाइल चिकित्सा दल तैयार।

-बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में बैकअप प्लान और करंट दुर्घटनाओं से बचाव के इंतजाम।

-शहर के नालों की सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी और रैन बसेरों की व्यवस्था सुदृढ़।

इन पर भी जोर

अतिरिक्त जिला कलक्टर परसाराम ने सभी विभागों को उपलब्ध संसाधनों की अद्यतन सूची तैयार रखने, जर्जर भवनों की पहचान करने तथा सरकारी भवनों की छतों की समय पर सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्य कार्यकारी अधिकारी रश्मि रानी ने ग्राम पंचायत स्तर पर राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत रखने और स्थानीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उपखंड स्तर पर भरतराज गुर्जर ने नागरिक सुरक्षा केंद्रों में उपलब्ध उपकरणों, गोताखोरों और राहत संसाधनों की जानकारी प्रस्तुत की। साथ ही उपखंड अधिकारियों, तहसीलदारों और विकास अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के रपटों, जलभराव वाले स्थानों और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।