जैसलमेर

Jaisalmer: मानसून थमा, खेत सूखे, खरीफ फसलों पर गहराया संकट, चिंतित नजर आ रहे किसान

मानसून की लंबी बेरुखी ने फतेहगढ़ क्षेत्र में खरीफ फसलों पर संकट खड़ा कर दिया है। शुरुआती बारिश के भरोसे की गई बाजरा, ग्वार और मूंग की बुवाई अब नमी के अभाव में प्रभावित होने लगी है। किसानों का कहना है कि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल नुकसान के साथ दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है।
2 min read
Jul 12, 2026
fatehgarh news
बारिश नहीं हुई तो किसानों पर दोबारा बढ़ेगा बुवाई का बढ़ेगा आर्थिक बोझ

फतेहगढ़. क्षेत्र में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मानसून पूर्व हुई अच्छी बारिश से उत्साहित किसानों ने बाजरा, ग्वार, मूंग सहित खरीफ की विभिन्न फसलों की बुवाई कर दी थी। उम्मीद थी कि नियमित मानसूनी बारिश के साथ फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी और अच्छी बढ़वार होगी, लेकिन शुरुआती बारिश के बाद मानसून की रफ्तार थम गई। पिछले कई दिनों से पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में नमी लगातार घट रही है। इसका सीधा असर फसलों पर दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर पौधों की बढ़वार रुक गई है, जबकि अनेक खेतों में फसलें मुरझाने लगी हैं। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसलों के सूखने का खतरा बढ़ सकता है। किसान बांकाराम जाखड़ का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो खरीफ की फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान रावत नेहरा ने बताया कि बारिश में और देरी हुई तो किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। इससे बीज, खाद और मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा तथा आर्थिक बोझ और गहरा जाएगा। लगातार बढ़ती गर्मी, तेज आंधी और सूखी हवाओं ने भी फसलों की स्थिति को और अधिक प्रभावित किया है। खेतों में नमी तेजी से समाप्त हो रही है, जिससे किसानों की मेहनत और उम्मीदें दोनों संकट में हैं।

आसमान पर टिकी नजरें

पूरे क्षेत्र के किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। समय पर अच्छी बारिश होने पर ही खरीफ फसलों को बचाया जा सकेगा, खेतों में हरियाली लौटेगी और किसानों के साथ पशुधन को भी राहत मिल सकेगी।

बारिश नहीं होने से ख़त्म हो रही खेतों की नमी

मानसून पूर्व हुई बारिश के भरोसे बाजरा, ग्वार और मूंग की बुवाई कर दी थी। अब कई दिनों से बारिश नहीं होने से खेतों की नमी खत्म हो रही है। फसल की बढ़वार रुक गई है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो मेहनत पर पानी फिर जाएगा और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

– बांकाराम जाखड़, किसान

...तो दुबारा बुवाई करनी पड़ेगी

खेतों में फसलें लगातार मुरझा रही हैं। बारिश में और देरी हुई तो दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी। इससे बीज, खाद, डीजल और मजदूरी का खर्च फिर से उठाना होगा। छोटे किसानों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ संभालना बेहद मुश्किल साबित होगा।

– रावत नेहरा, किसान

उत्पादन और पशुओं के चारे दोनों का संकट

तेज गर्मी, आंधी और सूखी हवाओं ने खरीफ फसलों की हालत खराब कर दी है। अब पूरे क्षेत्र के किसान आसमान की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं। समय पर अच्छी बारिश हुई तो फसल बच जाएगी, अन्यथा उत्पादन और पशुओं के चारे दोनों का संकट गहरा जाएगा।

– भंवराराम विश्नोई, किसान

Updated on:
12 Jul 2026 08:51 pm
Published on:
12 Jul 2026 08:50 pm