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Jaisalmer: 40 साल पुराने पीआरएस सिस्टम का होगा आधुनिक डिजिटल कायाकल्प

ट्रेन टिकट बुकिंग का अनुभव अब पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) अपनी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन जल्द लॉन्च करने जा रहा है। नई डिजिटल व्यवस्था का लक्ष्य यात्रियों को तेज, सरल और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन आरक्षण सुविधा उपलब्ध कराना है।
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jaisalmer railway station

जैसलमेर का रेलवे स्टेशन

जैसलमेर. ट्रेन टिकट बुकिंग का अनुभव अब पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) अपनी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन जल्द लॉन्च करने जा रहा है। नई डिजिटल व्यवस्था का लक्ष्य यात्रियों को तेज, सरल और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन आरक्षण सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही रेलवे करीब 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) को भी आधुनिक तकनीक से अपग्रेड कर रहा है। इससे टिकट बुकिंग नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक बेहतर डिजिटल अनुभव मिलेगा।

एक स्क्रीन पर पूरी जानकारी, कम चरणों में होगा आरक्षण

नई वेबसाइट में यात्रियों की सुविधा को केंद्र में रखा गया है। टिकट बुकिंग के दौरान आने वाली अनावश्यक बाधाओं को कम किया जा रहा है। इसमें कैप्चा, पॉपअप और ध्यान भटकाने वाले ग्राफिक्स को हटाने की तैयारी है।

नई व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं

-सभी श्रेणियों की सीट उपलब्धता एक ही स्क्रीन पर दिखाई देगी।

-टिकट बुकिंग के चरण कम होंगे।

-यात्री विवरण सुरक्षित रहेंगे।

-अगली बार आरक्षण प्रक्रिया और आसान होगी।

-वेबसाइट का इंटरफेस तेज, सरल और लगभग विज्ञापन मुक्त रहेगा।

यात्रियों के सुझावों से तैयार हो रहा डिजिटल प्लेटफॉर्म

आईआरसीटीसी और सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (क्रिस) नई वेबसाइट को यात्रियों की जरूरतों के अनुसार तैयार कर रहे हैं। हाल ही में जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के विद्यार्थियों को बीटा वर्जन दिखाकर सुझाव लिए गए।

खास बात यह है कि कुछ समय पहले विद्यार्थियों ने मौजूदा वेबसाइट की तकनीकी कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद रेलवे ने कई सुधार किए। नई वेबसाइट को भारतीय रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन से जोड़ने की योजना है, जिससे बैकएंड सिस्टम अधिक मजबूत होगा।

तत्काल टिकट में फर्जी गतिविधियों पर लगेगी रोक

रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग में बॉट्स और फर्जी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी स्तर पर लगातार बदलाव कर रहा है। नई डिजिटल व्यवस्था में सुरक्षा मानकों को मजबूत किया जा रहा है, जिससे वास्तविक यात्रियों को बेहतर अवसर मिल सके।

इसी दिशा में रेलवे का रेलवनऐप चार करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार कर चुका है। यह रेलवे सेवाओं के लिए तेजी से उभरता डिजिटल प्लेटफॉर्म बन रहा है।

डेटा क्या बता रहा है

-करोड़ों यात्री प्रतिदिन रेलवे की डिजिटल सेवाओं का उपयोग करते हैं।

-ऑनलाइन टिकट बुकिंग में गति और सरलता सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

-पुराने सिस्टम पर बढ़ते दबाव को देखते हुए तकनीकी अपग्रेड जरूरी हो गया है।

-डिजिटल प्लेटफॉर्म बढ़ने से काउंटर आधारित आरक्षण पर निर्भरता कम हो रही है।

नई वेबसाइट और आधुनिक पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम लागू होने के बाद यात्रियों को पहले से अधिक तेज,सुरक्षित और सुविधाजनक ऑनलाइन टिकट बुकिंग का अनुभव मिलेगा।

-हितेश यादव, सीनियर डीसीएम,जोधपुर मंडल