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Jaisalmer: प्यासा जैसलमेर, लडखड़़ाई सप्लाई, हर मोहल्ले में पानी के लिए जंग, टैंकरों के भरोसे हजारों परिवार

बाड़मेर लिफ्ट परियोजना की विद्युत आपूर्ति बाधित होने से जैसलमेर का पेयजल संकट गहरा गया है। जल उत्पादन प्रभावित होने के कारण शहर में 5 से 8 दिन के अंतराल से पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे हजारों परिवारों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात ऐसे हैं कि लोग निजी टैंकरों पर निर्भर हैं और हर बूंद पानी के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं।
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जैसलमेर। जैसलमेर की आरपी कॉलोनी में पेयजल किल्लत के खिलाफ विरोध दर्ज करवाते लोग।

जैसलमेर. मरुस्थल की तपती धरती पर पानी हमेशा से सबसे बड़ी जरूरत रहा है, लेकिन इन दिनों स्वर्णनगरी के बाशिंदों के लिए यही जरूरत सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। बाड़मेर लिफ्ट परियोजना के मोहनगढ़ हेडवक्र्स तक जाने वाली विद्युत लाइन के टावर गिरने से उत्पन्न संकट ने जैसलमेर की पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह झकझोर दिया है। जल उत्पादन प्रभावित होने के कारण शहर में 5 से 8 दिन के अंतराल से जलापूर्ति की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि घरों में नल सूखे पड़े हैं और लोग पानी की हर बूंद के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं। शहर के गली-मोहल्लों में अब जल संकट के चलते लोग खुल कर रोष जता रहे हैं। जिन घरों में पानी संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है।

बिजली संकट से थम गया जल उत्पादन का पहिया

जलदाय व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले मोहनगढ़ हेडवक्र्स तक बिजली पहुंचाने वाली लाइन के टावर क्षतिग्रस्त होने के बाद जल उत्पादन क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है। उत्पादन कम होने से उपलब्ध पानी का वितरण सीमित करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर शहर की जलापूर्ति पर दिखाई दे रहा है। निर्धारित समय पर पानी नहीं मिलने से आमजन की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। विभागीय स्तर पर सुधार कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन हालात अभी सामान्य होने से दूर हैं।

टैंकरों पर बढ़ी निर्भरता, जनजीवन प्रभावित

पेयजल संकट ने शहर की सामान्य दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। घरों के अलावा होटल, धर्मशालाएं, छोटे व्यवसाय और अन्य संस्थान भी पानी की कमी से जूझ रहे हैं। निजी टैंकरों की मांग अचानक बढऩे से कई लोगों को सैकड़ों रुपए की राशि चुकानी पड़ रही है। कई क्षेत्रों में टैंकर पहुंचते ही पानी भरने की होड़ मच जाती है। तेज गर्मी व उमस के बीच सीमित पानी मिलने से लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है। हालत इतने विषम हैं कि पिछले दिनों रात के समय आरपी कॉलोनी के लोग अपने घरों से बाहर निकल और उन्होंने पीने के पानी के संकट को लेकर जिम्मेदारों को खूब खरी-खरी सुनाई।

वैकल्पिक तंत्र नदारद

जैसलमेर जैसे मरुस्थलीय जिले में पेयजल व्यवस्था को लेकर मजबूत वैकल्पिक तंत्र होना चाहिए। एक तकनीकी खराबी या प्राकृतिक आपदा के कारण पूरे शहर की जलापूर्ति प्रभावित होना अब आ हो गया है। लोगों में अब आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से जलापूर्ति जल्द सामान्य करने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए स्थायी और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर वर्ष किसी न किसी कारण से पेयजल संकट पैदा हो जाता है और उसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ता है।

फैक्ट फाइल -

- 90 हजार अनुमानित शहर की जनसंख्या

- 45 वार्डों में विभक्त है जैसलमेर

- 18 एमएल पानी की रोजाना जरूरत

- 50 प्रतिशत की हो रही आपूर्ति