
जैसलमेर. दीपावली की खरीदारी अब सिर्फ बाजारों तक सीमित नहीं रही। मोबाइल स्क्रीन पर चमकते ऑफर, कुछ मिनटों में डिलीवरी का दावा और भारी छूट के संदेश उपभोक्ताओं को ऑनलाइन खरीदारी की ओर खींच रहे हैं। लेकिन इसी डिजिटल चमक के पीछे साइबर ठगी का ऐसा जाल भी सक्रिय है, जहां एक गलत लिंक खोलना, फर्जी वेबसाइट पर भुगतान करना या गोपनीय जानकारी साझा करना बैंक खाते पर भारी पड़ सकता है। त्योहार की जल्दबाजी और आकर्षक ऑफर का लालच साइबर ठगों के लिए लोगों को निशाना बनाने का अवसर बन सकता है।
साइबर ठगी का तरीका अब पहले से अधिक आकर्षक और भरोसेमंद दिखाई देने लगा है। ठग नामी ई-कॉमर्स कंपनियों और ब्रांड जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट तैयार करते हैं। सोशल मीडिया पर विज्ञापन, मैसेज और व्हाट्सऐप लिंक के जरिए 70 से 90 प्रतिशत तक छूट जैसे लुभावने दावे किए जा सकते हैं। उपभोक्ता जल्दबाजी में लिंक खोलकर भुगतान कर देते हैं। इसके बाद न तो सामान मिलता है और न ही भुगतान की गई राशि आसानी से वापस मिलती है। कई मामलों में ऐसी वेबसाइट पर दर्ज की गई निजी और बैंकिंग जानकारी के दुरुपयोग का खतरा भी रहता है।
डिजिटल भुगतान के दौरान क्यूआर कोड और यूपीआई का इस्तेमाल करते समय सबसे ज्यादा सतर्कता जरूरी है। पैसे प्राप्त करने के नाम पर भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन करना या अनजान व्यक्ति के निर्देश पर यूपीआई पिन डालना नुकसान का कारण बन सकता है। इसी तरह बैंक या भुगतान ऐप के नाम पर आने वाले फोन और संदेशों में ओटीपी, पासवर्ड अथवा बैंक संबंधी जानकारी मांगने वालों से सावधान रहना चाहिए। स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवाकर भी ठगी की कोशिश की जा सकती है।
वेबसाइट की जांच: खरीदारी से पहले वेबसाइट का आधिकारिक यूआरएल और उसकी विश्वसनीयता जांचें।
छूट का गणित: बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत वाले ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें।
ओटीपी की गोपनीयता: बैंक, भुगतान ऐप या किसी अनजान व्यक्ति से ओटीपी साझा न करें।
क्यूआर कोड सावधानी: भुगतान प्राप्त करने के नाम पर भेजे गए क्यूआर कोड स्कैन न करें।
भुगतान की पुष्टि: यूपीआइ से भुगतान करते समय प्राप्तकर्ता का नाम और राशि जांचें।
ऑनलाइन ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जल्दबाजी में भुगतान नहीं करना है। किसी भी अनजान लिंक, आकर्षक विज्ञापन या असामान्य छूट की पहले पुष्टि करनी चाहिए। यूपीआइ पिन केवल भुगतान करने के लिए दर्ज किया जाता है, रकम प्राप्त करने के लिए नहीं। ओटीपी, पासवर्ड और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। यदि ऑनलाइन ठगी हो जाए तो तत्काल बैंक को सूचना दें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
- डॉ. जालमसिंह, साइबर एक्सपर्ट