
रामदेवरा में नहरी पानी के भंडारण के लिए बनी एसआर टंकी।
रामदेवरा. धार्मिक नगरी रामदेवरा तक इंदिरा गांधी नहर परियोजना की पाइपलाइन पहुंच गई, लेकिन कस्बेवासियों को अब भी मीठे पेयजल का इंतजार है। करीब तीन दशक से नहर के मीठे पानी की आस लगाए बैठे लोगों को पीने के पानी के लिए आज भी जेब ढीली करनी पड़ रही है। घरों में प्रतिदिन 20 रुपए खर्च कर पानी का कैंपर मंगवाना परिवारों की मजबूरी बन गया है। दूसरी ओर, नहर का पानी स्थानीय नलकूपों के खारे पानी के साथ मिलाकर सप्लाई किया जा रहा है। ऐसे में नहरी पानी पहुंचने के बावजूद लोगों को शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं मिल पाई है। लाखों रुपए की लागत से स्थापित दो आरओ प्लांट भी बंद पड़े हैं। नतीजतन, मीठे पानी की उम्मीद और सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत के बीच रामदेवरा के बाशिंदे आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
रामदेवरा में इंदिरा गांधी नहर परियोजना का पानी स्थानीय नलकूपों के पानी के साथ मिलाकर आपूर्ति किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि घरों तक पहुंचने वाले पानी का इस्तेमाल बर्तन धोने, कपड़े साफ करने और अन्य घरेलू कामों में तो हो जाता है, लेकिन पीने के लिए इसकी गुणवत्ता को लेकर भरोसा नहीं है। पानी सूखने के बाद बर्तनों पर नमक की परत जमने की शिकायतें भी हैं। ऐसे में नहरी पाइपलाइन पहुंचने के बावजूद कस्बे में शुद्ध मीठे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
पेयजल की जरूरत पूरी करने के लिए कस्बे के अनेक परिवार बाजार से मिनरल वाटर के कैंपर खरीद रहे हैं। एक कैंपर की कीमत करीब 20 रुपए है। परिवार की जरूरत के अनुसार प्रतिदिन एक या अधिक कैंपर मंगवाने पड़ते हैं। इससे हर महीने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। धार्मिक नगरी होने के कारण रामदेवरा में स्थानीय आबादी के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही भी रहती है। ऐसे में यहां सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब नहर का पानी कस्बे तक पहुंच चुका है तो उन्हें पीने के पानी के लिए अलग से खर्च क्यों करना पड़ रहा है।
आमजन को कम कीमत पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार की ओर से रामदेवरा में दो आरओ प्लांट स्थापित किए गए थे। शुरुआती दिनों में कुछ समय तक इनका संचालन हुआ, लेकिन बाद में दोनों बंद हो गए। वर्तमान में ये प्लांट उपयोग में नहीं आ रहे हैं। योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ती दर पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन संचालन और रखरखाव की व्यवस्था नहीं होने से इसका लाभ नहीं मिल रहा। ग्रामीणों का सवाल है कि लाखों रुपए खर्च कर प्लांट स्थापित करने के बाद इनके नियमित संचालन की जिम्मेदारी किसकी है और इन्हें दोबारा शुरू करने के प्रयास क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा को लेकर भी चिंता जताई है। नहरी पानी और नलकूपों के पानी को मिलाकर सप्लाई किए जाने से इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पानी में फ्लोराइड की वास्तविक मात्रा और उसके पीने योग्य होने की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही संभव है। ऐसे में नहर और नलकूप के मिश्रित पानी के नमूनों की जांच करवाकर रिपोर्ट सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि लोगों को पेयजल की गुणवत्ता की सही जानकारी मिल सके।
रामदेवरा में नहरी पानी पहुंचने की उम्मीद करीब तीन दशक से बनी हुई है। पाइपलाइन पहुंचने और पानी के भंडारण के लिए एसआर टंकी जैसी व्यवस्थाएं तैयार होने पर लोगों को लगा था कि अब खारे पानी से राहत मिलेगी। इसके बावजूद घरों में पीने योग्य मीठा पानी उपलब्ध नहीं हो पाया है। नहरी पानी की आपूर्ति व्यवस्था, भंडारण और वितरण की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि परियोजना का लाभ कस्बे के प्रत्येक परिवार तक पहुंचे।
वर्तमान में नहर का फिल्टर पानी पूरे रामदेवरा में सप्लाई करना संभव नहीं है। नहर और नलकूप के मिश्रित पानी के नमूने प्रयोगशाला में भेजकर जांच करवाई जाएगी। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
— आशीष सिंह, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग, पोकरण।
Updated on:
3 Nov 2026, 8:37 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 8:34 PM IST
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